गुप्तचर विशेषभारत

बाबा रामदेव ने 7 बार मौत को दिया है चकमा,जानलेवा हमला भी उनका कुछ बिगड़ नहीं पाया

आज बाबा रामदेव को कौन नहीं जनता, बाबा की अकसर उनके शारीरिक स्टेमिना और लचीलेपन के लिए तारीफ की जाती है। बाबा रामदेव के मुताबिक कठिन योगाभ्यास के चलते उनका शरीर इतना लचीला हुआ है। उन्होंने खुद एक बार एक टीवी प्रोग्राम के दौरान बताया था कि महज तीन से 4 महीने की उम्र में ही उनके चेहरे के एक हिस्से में पैरालाइसिस हो गया था। इस समस्या से निपटने के लिए उन्होंने 7 साल की आयु से ही कठिन योगाभ्यास किया और काफी हद तक सही हो गए। हालांकि अब भी उनकी एक आंख पर इसका कुछ असर दिखता है।

बाबा रामदेव ने 7 बार मौत को दिया है चकमा,जानलेवा हमला भी उनका कुछ बिगड़ नहीं पाया

बाबा रामदेव अपनी जीवटता को लेकर कहते हैं कि वह 7 बार मौत के मुंह से बाहर निकले हैं औऱ मानते हैं कि शरीर नाशवान होता है। वह बताते हैं कि पैरालाइसिस के अटैक से बचना मौत के मुंह से निकलने जैसा ही था। ‘द वीक’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक बार बचपन में रामकृष्ण कहे जाने वाले बाबा रामदेव 25 फुट ऊंची इमारत से गिर गए थे और उनके माथे पर 7 टांके लगे थे। यही नहीं एक बार वह भैंस चराते हुए उसकी पूंछ पकड़े हुए गहरे तालाब में चले गए और एक ग्रामीण ने उन्हें डूबने से बचाया था। यही नहीं एक बार वह हल जोत रहे थे तो कुछ परिजनों ने उन पर हमला कर दिया था।

इसमें वह बाल-बाल बचे थे। दरअसल पारिवारिक विवाद में कुछ लोग उनकी मां से बुरा बर्ताव करते थे, जिसका विरोध करने पर उन पर यह हमला हुआ था। एक बार उन्हें करीब 50 लोगों की हिंसक भीड़ ने घेर लिया था। इस दौरान उन्होंने अपनी खड़ाऊं उतार ली थी और उसके जरिए अपना बचाव किया था।

बाबा रामदेव ने 7 बार मौत को दिया है चकमा,जानलेवा हमला भी उनका कुछ बिगड़ नहीं पाया

 

एक अन्य घटना में वह खुद बताते हैं कि एक बार वह आर्सेनिक के जरिए अस्थमा का इलाज कर रहे थे और गलती से उन्होंने उसी बर्तन में दूध उबाल लिया था। आर्सेनिक शरीर में जाने के चलते उन्हें उल्टियां आने लगीं और फिर अस्पताल ले जाना पड़ा। बाबा रामदेव कहते हैं कि यह आखिरी मौका था, जब उन्हें अस्पताल जाना पड़ा था। वह कहते हैं कि इसके बाद उन्होंने आर्सेनिक का इस्तेमाल बंद कर दिया और जहर को बाहर निकालने के लिए आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल किया।

गौरतलब है कि बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद की ओर से हाल ही में कोरोनिल नाम से एक दवा लॉन्च की गई थी, जिससे कोरोना के ठीक होने का दावा किया गया था। हालांकि विवाद के बाद पतंजलि ने इस दवा को इम्युनिटी बूस्टर के तौर पर बेचने का फैसला लिया है। बता दें कि कोरोना काल के दौरान जून तिमाही में बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद के मुनाफे में 40 पर्सेंट का इजाफा हुआ है।

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