आस्थागुप्तचर विशेष

तो… इस वजह से मरने के बाद लोग बनते हैं भूत

द गुप्चार डेस्क|भूत-प्रेत के नाम सुनते ही लोगों में एक अनजाना भय लोगों की मन को सताता है। इसके किस्से भी सुनने को मिल जाते है और लोग बहुत रुचि व विस्मय के साथ इन्हें सुनते है। लेकिन क्या वास्तव में भूत-प्रेत होते है! यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है। जानना चाहते हैं कि मरने के बाद भूत क्यों बनते हैं! आइए जानते हैं मरने के बाद भूत बनने के कारण क्या है।

इच्छाओं का पूरा न होना:

मरने के बाद भूत बनने का सबसे पहला और मुख्य कारण है इच्छाओं का पूरा नहीं होना। ऐसा कहा भी जाता है कि अगर किसी इंसान की इच्छा अधूरी रह गई तो मरने की बाद उस इंसान की आत्मा भटकती रहती है। इस बात में लगभग सभी संस्कृतियां विश्वास करती हैं।

आध्यात्मिक मान्यताओं का अभाव:

कुछ संस्कृतियां मानती हैं कि मरने के बाद व्यक्ति भूत बनता है, यदि जीते जी उसने आध्यात्मिक मान्यताओं का अनुसरण नहीं किया है। यही कारण है कि बहुत सी परम्पराओं में जीवन के दौरान सकारात्मक आध्यात्मिक सिद्धांतों का पालन करने पर जोर दिया गया है। इसलिए हमारे बड़े लोग हमें आध्यात्मिक पथ पर आगे बढऩे और मोक्ष प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं।

हर धर्म में कुछ आध्यात्मिक नियम हैं जिनका पालन कर और संतुलित जीवन जीकर व्यक्ति मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। शास्त्र मानते हैं कि एक प्रबुद्ध और मोक्ष प्राप्त करने वाला व्यक्ति जीवन और मृत्यु से छुटकारा पाता है। इस प्रकार का व्यक्ति मरने के बाद भूत या प्रेतात्मा नहीं बनता है।

लालच और लगाव:
जो व्यक्ति ज्यादा लालची होता है या सांसारिक चीजों से ज्यादा लगाव रखता है वह मरने के बाद जरूर भूत बनता है, यह कुछ विचारधारों का मानना है। पैसे के प्रति ज्यादा लगाव भी व्यक्ति के मरने के बाद भूत बनने का एक कारण है। अधूरी इच्छाओं की भांति यह लगाव व्यक्ति को सांसारिक मोह-माया से बांधे रखता है और यही कारण है कि मरने के बाद भी उसकी आत्मा पृथ्वी पर भटकती रहती है।

शायद अब आप जान गए हैं कि मरने के बाद भूत बनने का क्या कारण है! यही कारण है कि सभी आध्यात्मिक परम्पराओं में व्यक्ति को लालच और अभिलाषाओं से दूर रहने के लिए कहा गया है। अनेक दार्शनिकों ने भी लिखा है कि इच्छा ही सभी दुखों का कारण है।

नकारात्मक सोच:
क्या हम मरने के बाद भूत बनेंगे! जो लोग नकारात्मक सोचते हैं वे अपने दिमाग में जहर भर लेते हैं। और इस प्रकार का जहरीला दिमाग गुस्सा, दुख और अवसाद जैसी नकारात्मक भावनाओं का कारण बनता है। जब एक व्यक्ति अपने जीवन को नकारात्मकता से भर लेता है तो मरने के बाद प्रेतात्मा बनने का ज्यादा डर रहता है।

इसी कारण पुराने लोग जीवन में सकारात्मक सोच रखने के लिए कहते हैं। अपने दिमाग को और आस-पास के वातावरण को सकारात्मक रखना मरने के बाद भी फायदेमंद है। सकारात्मक ऊर्जा, शरीर और आत्मा दोनों के लिए फायदेमंद है।

अहंकार की भावना
अहंकार की भावना ज्यादा रखने वाला व्यक्ति मरने के बाद निश्चित ही भूत बनता है क्यों कि पृथ्वी पर उसकी कुछ चीजें अधूरी रह जाती हैं। शारीरिक रूप से शांति रखने पर ही आत्मा शांत रहेगी और एक अलग प्रभुता को प्राप्त करेगी। यह भी एक कारण है जिससे लोग प्रेतात्मा बनते हैं।

 

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