छत्तीसगढ़

NAXAL SURRENDER : दंतेवाड़ा में डेढ़ करोड़ से अधिक के इनामी 63 नक्सली मुख्यधारा में लौटे

लोन वराटू योजना का असर, नक्सल उन्मूलन की दिशा में बड़ी सफलता

दंतेवाड़ा : छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को बड़ी सफलता मिली है। जिले में 63 नक्सलियों ने सामूहिक रूप से आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों पर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था। यह आत्मसमर्पण राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लोन वराटू’ योजना के अंतर्गत हुआ है, जिसका उद्देश्य भटके हुए युवाओं को हिंसा से दूर कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

आत्मसमर्पण कार्यक्रम में पुलिस, सीआरपीएफ और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में विभिन्न कैडर के नक्सली शामिल हैं, जिनमें हार्डकोर और इनामी नक्सली भी हैं। इन नक्सलियों ने लंबे समय से नक्सली संगठन में रहते हुए कई आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया था, लेकिन सरकार की पुनर्वास नीति और लगातार संवाद के चलते उन्होंने आत्मसमर्पण का निर्णय लिया।

राज्य सरकार की लोन वराटू योजना नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना की दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हो रही है। इस योजना के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, आवास, रोजगार, शिक्षा एवं कौशल प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान की जाती है, जिससे वे सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें। अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत सभी पात्र सुविधाएं दी जाएंगी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दंतेवाड़ा और बस्तर अंचल में लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव के कारण नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं। नक्सलियों को अब यह एहसास हो रहा है कि हिंसा के रास्ते से उनका भविष्य सुरक्षित नहीं है, जबकि सरकार द्वारा दिए जा रहे अवसर उन्हें एक नई शुरुआत का मौका दे रहे हैं।

जिला प्रशासन ने इसे नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक ऐतिहासिक सफलता बताया है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में और भी नक्सलियों के आत्मसमर्पण की संभावना है। यह सामूहिक आत्मसमर्पण न केवल सुरक्षा बलों की रणनीति की सफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि संवाद, विकास और पुनर्वास के माध्यम से नक्सल समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

दंतेवाड़ा में हुआ यह आत्मसमर्पण कार्यक्रम छत्तीसगढ़ में शांति, विकास और विश्वास की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

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