शराब घोटाला केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, चैतन्य बघेल की जमानत बरकरार.. ED और राज्य सरकार की याचिका खारिज

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2,161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने उनकी जमानत को बरकरार रखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) और छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में उठे महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों पर भविष्य में विस्तृत सुनवाई की जा सकती है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में शराब घोटाले की जांच राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि फिलहाल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा दिए गए जमानत आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है। अदालत ने माना कि जमानत देते समय हाईकोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड, जांच की स्थिति और कानूनी पहलुओं पर विचार किया था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में जांच एजेंसियों के संबंध में की गई कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों को आवश्यक नहीं माना और उन्हें रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने संकेत दिया कि जमानत का आदेश कायम रहेगा, लेकिन कानूनी प्रश्न भविष्य की सुनवाई में तय किए जा सकते हैं।
क्या थी ED और राज्य सरकार की दलील?
चैतन्य बघेल को जनवरी 2026 में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद ED, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
जांच एजेंसियों ने अदालत में कहा कि—
मामला बड़े आर्थिक अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।
आरोपी को जमानत मिलने से जांच प्रभावित हो सकती है।
कुछ महत्वपूर्ण गवाह सामने आने से बच रहे हैं।
जांच अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए जमानत पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
एजेंसियों का तर्क था कि इतने बड़े वित्तीय अपराध में आरोपी को मिली राहत से जांच की निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका है।
बचाव पक्ष ने क्या कहा?
चैतन्य बघेल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि—
हाईकोर्ट ने सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद ही जमानत दी थी।
आरोपी लगातार जांच में सहयोग कर रहा है।
लंबे समय से जांच चल रही है और हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं बची है।
जमानत का अर्थ दोषमुक्ति नहीं होता, बल्कि मुकदमे के दौरान स्वतंत्रता का संवैधानिक अधिकार है।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष जमानत रद्द कराने के लिए कोई नया ठोस आधार प्रस्तुत नहीं कर सका।
जनवरी में हाईकोर्ट ने दी थी जमानत
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2 जनवरी 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग और कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में चैतन्य बघेल को जमानत प्रदान की थी। उसी आदेश को चुनौती देते हुए ED, EOW और राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।
अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान परिस्थितियों में जमानत रद्द करने का आधार नहीं बनता।
क्या है 2,161 करोड़ रुपये का कथित शराब घोटाला?
यह मामला वर्ष 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ की शराब नीति और सरकारी शराब कारोबार में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि—
सरकारी शराब वितरण व्यवस्था का दुरुपयोग किया गया।
शराब की खरीद, आपूर्ति और बिक्री की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं।
कथित तौर पर एक संगठित नेटवर्क के माध्यम से अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया गया।
इससे सरकारी राजस्व को लगभग 2,161 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा।
इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू की थी, जबकि आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और अन्य एजेंसियां भी अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही हैं।
क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब केस खत्म हो गया?
नहीं। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश केवल जमानत से संबंधित है।
इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने आरोपी को निर्दोष घोषित कर दिया है। मुकदमे की सुनवाई, जांच और आरोपों पर अंतिम फैसला संबंधित न्यायालय में साक्ष्यों के आधार पर होगा।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जमानत देते समय अदालत केवल यह देखती है कि आरोपी को मुकदमे के दौरान जेल में रखने की आवश्यकता है या नहीं। दोषी या निर्दोष होने का निर्णय ट्रायल पूरा होने के बाद ही किया जाता है।
राजनीतिक असर भी रहेगा
चूंकि मामला पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के परिवार से जुड़ा है, इसलिए इस फैसले के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। एक ओर कांग्रेस इसे न्यायिक प्रक्रिया में राहत के रूप में देख रही है, वहीं जांच एजेंसियां और राज्य सरकार मामले की आगे की जांच जारी रखने की बात कह रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत बरकरार रखने से फिलहाल चैतन्य बघेल को राहत मिल गई है, लेकिन कथित शराब घोटाले की जांच और इससे जुड़े मुकदमों की प्रक्रिया अभी जारी रहेगी। आने वाले समय में इस मामले के कानूनी और राजनीतिक दोनों आयामों पर नजर बनी रहेगी।

