छत्तीसगढ़ में रेलवे विस्तार की रफ्तार तेज, बजट आवंटन 24 गुना बढ़ा; 36 परियोजनाओं पर चल रहा काम

रायपुर: छत्तीसगढ़ में रेलवे के बुनियादी ढांचे के विस्तार को बीते वर्षों में बड़ी गति मिली है। राज्य में रेलवे परियोजनाओं के लिए औसत वार्षिक बजट आवंटन प्री-2014 के मुकाबले करीब 24 गुना बढ़ गया है। वर्ष 2009-14 के दौरान जहां रेलवे परियोजनाओं और सुरक्षा कार्यों के लिए औसतन ₹311 करोड़ प्रतिवर्ष मिलते थे, वहीं वित्त वर्ष 2026-27 में यह राशि बढ़कर ₹7,470 करोड़ हो गई है।
राज्यसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने छत्तीसगढ़ में रेलवे के विस्तार और चल रही परियोजनाओं की जानकारी दी। रेलवे का फोकस राज्य के आदिवासी, पिछड़े और खनिज बहुल क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी देने के साथ माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने पर भी है।
नई रेल लाइन बिछाने की रफ्तार 17 गुना बढ़ी
छत्तीसगढ़ में नई रेल लाइन के निर्माण की गति में भी बड़ा बदलाव आया है। वर्ष 2009-14 के दौरान औसतन 6.4 किलोमीटर नई रेल लाइन प्रतिवर्ष कमीशन की जाती थी। वर्ष 2014 से 2026 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 109.29 किलोमीटर प्रतिवर्ष हो गया। इस दौरान कुल 1,311 किलोमीटर नई रेल लाइन शुरू की गई।
36 परियोजनाओं में 2,398 किलोमीटर का काम
1 अप्रैल 2026 तक छत्तीसगढ़ में रेलवे की 36 परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें 8 नई रेल लाइन और 28 दोहरीकरण परियोजनाएं शामिल हैं। इनकी कुल लंबाई 2,398 किलोमीटर है और इन परियोजनाओं की कुल स्वीकृत लागत ₹48,202 करोड़ है। इनमें से 1,151 किलोमीटर रेल लाइन का काम पूरा हो चुका है।
ये बड़ी परियोजनाएं हो चुकी हैं पूरी
छत्तीसगढ़ में कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। इनमें दल्लीराजहरा–रावघाट की 95 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन प्रमुख है, जिस पर ₹1,628 करोड़ खर्च हुए हैं। यह लाइन स्टील उद्योगों को कच्चे माल के प्रमुख स्रोतों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इसके अलावा 152 किलोमीटर लंबी चांपा–झारसुगुड़ा तीसरी लाइन ₹1,227 करोड़ की लागत से पूरी की गई है। 203 किलोमीटर लंबी रायपुर–टिटलागढ़ रेल लाइन का दोहरीकरण ₹1,171 करोड़ में पूरा हुआ है। वहीं खरसिया–कोरिछापार 43 किलोमीटर नई रेल लाइन पर ₹851 करोड़ खर्च किए गए हैं।
बस्तर तक रेल नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी
छत्तीसगढ़ में अभी कई बड़ी रेल परियोजनाओं पर काम जारी है। खरसिया–परमलकसा नई डबल लाइन 278 किलोमीटर लंबी है और इसके लिए ₹7,854 करोड़ का प्रावधान है।
इसी तरह गेवरा रोड–पेंड्रा रोड नई रेल लाइन 135 किलोमीटर की है, जिसकी लागत ₹3,724 करोड़ है। रावघाट–जगदलपुर नई रेल लाइन 140 किलोमीटर लंबी है और इस पर ₹3,513 करोड़ खर्च किए जाने हैं। यह परियोजना बस्तर क्षेत्र में रेल नेटवर्क के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके अलावा खरसिया–धरमजयगढ़ नई रेल लाइन 122 किलोमीटर लंबी है और इसकी अनुमानित लागत ₹3,407 करोड़ है।
आदिवासी और दूरस्थ इलाकों तक रेल पहुंचाने की तैयारी
राज्य के ऐसे क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी भी चल रही है, जहां अभी रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके लिए पिछले कुछ वर्षों में 2,455 किलोमीटर लंबाई वाले 14 फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) को मंजूरी दी गई है।
इनमें अंबिकापुर–रामानुजगंज–गढ़वा रोड/बरवाडीह 262 किलोमीटर, सरडेगा–पत्थलगांव–अंबिकापुर 218 किलोमीटर और धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा 292 किलोमीटर जैसे महत्वपूर्ण रेल मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी तैयार की जा चुकी है।
वहीं गढ़चिरौली–बीजापुर–बचेली 490 किलोमीटर, कोठागुडेम–किरंदुल 180 किलोमीटर और धमतरी–बांसकोट–अमरावती–कोंडागांव 183 किलोमीटर रेल मार्गों का फील्ड सर्वे भी जारी है।
वंदे भारत समेत 18 नई ट्रेन सेवाएं
रेलवे ने छत्तीसगढ़ में यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए 18 प्रमुख ट्रेन सेवाएं शुरू की हैं। राज्य में फिलहाल दो जोड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस संचालित हो रही हैं। इनमें दुर्ग–विशाखापट्टनम और बिलासपुर–नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस शामिल हैं।
इसके अलावा उधना–ब्रह्मपुर अमृत भारत एक्सप्रेस की एक जोड़ी भी छत्तीसगढ़ से होकर गुजरती है। स्थानीय यात्रियों की सुविधा के लिए रायपुर–अंतागढ़ डेमू समेत कई मेमू और डेमू सेवाएं भी शुरू की गई हैं। रायपुर, राजिम और अभनपुर सहित कई क्षेत्रों में क्षेत्रीय रेल कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा रहा है।
वन और भूमि संबंधी मंजूरियों से जुड़ी चुनौतियां
रेल परियोजनाओं को पूरा करने में वन मंजूरी, भूमि अधिग्रहण, उपयोगिता सेवाओं के स्थानांतरण और भौगोलिक परिस्थितियां जैसी चुनौतियां सामने आती हैं। रेलवे के मुताबिक इन बाधाओं को दूर करते हुए परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क के विस्तार से न केवल यात्री कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है, बल्कि राज्य के खनिज और औद्योगिक क्षेत्रों से माल ढुलाई को भी गति मिलने की संभावना है। खासकर बस्तर और अन्य दूरस्थ क्षेत्रों में नई रेल लाइनों के विस्तार को क्षेत्रीय विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।