छत्तीसगढ़

कथा से पहले ‘क्लेश’: बागेश्वर बाबा के कार्यक्रम में बवाल, बसंत अग्रवाल की किरकिरी; कोरबा में मारपीट के पीछे गुटबाजी और वर्चस्व की लड़ाई उजागर

कोरबा: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की प्रस्तावित हनुमंत कथा शुरू होने से पहले ही बड़ा विवाद सामने आ गया। आयोजन स्थल पर रविवार रात उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब आयोजन समिति, सुरक्षा कर्मियों और स्थानीय समर्थकों के बीच विवाद बढ़ते-बढ़ते मारपीट में बदल गया।

जानकारी के अनुसार, ग्राम ढप-ढप में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान शास्त्री के आगमन के बाद उनके ठहरने के स्थान अग्रसेन भवन में बैठने और मुलाकात की व्यवस्था को लेकर बहस शुरू हुई। यह विवाद धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई हो गई।

हालांकि, अब सामने आ रही जानकारी इस घटना को सिर्फ व्यवस्था से जुड़ा विवाद नहीं, बल्कि स्थानीय गुटबाजी और वर्चस्व की लड़ाई से भी जोड़ रही है। सूत्रों के मुताबिक, कार्यक्रम से जुड़े दो प्रमुख पक्ष अमरजीत और बसंत अग्रवाल के बीच पहले से चल रही खींचतान इस टकराव की बड़ी वजह बनी।

बताया जा रहा है कि बाबा के समर्थकों के बीच दो गुट बन गए थे। एक पक्ष अमरजीत के समर्थन में था, जबकि दूसरा बसंत अग्रवाल के साथ खड़ा नजर आया। आयोजन में प्रभाव और नियंत्रण को लेकर यह अंदरूनी टकराव अचानक खुलकर सामने आ गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया। कई लोग यह भी बता रहे हैं कि जमीन कारोबारी बसंत अग्रवाल पर भीड़ ने हाथ साफ़ किया है।

घटना के दौरान मौजूद श्रद्धालुओं में डर और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, जिससे कुछ समय के लिए कार्यक्रम की व्यवस्थाएं पूरी तरह प्रभावित हो गईं। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद दोनों पक्षों को शांत कराया।

स्थिति सामान्य होने के बाद देर रात कार्यक्रम को दोबारा शुरू किया गया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने आयोजन की तैयारियों और समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक बड़ा सवाल यह भी है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन में जहां हजारों श्रद्धालु जुटते हैं, वहां अगर व्यवस्थाओं के साथ-साथ आंतरिक गुटबाजी हावी हो जाए, तो क्या ऐसे आयोजन सुरक्षित और व्यवस्थित रह पाएंगे?

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