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Basant Panchami : जब ज्ञान के साथ जागता है प्रेम, जानिए क्यों कहा जाता है इसे भारत का प्राचीन ‘लव डे’

Basant Panchami :  वसंत पंचमी को आमतौर पर मां सरस्वती के पूजन और ज्ञान के पर्व के रूप में जाना जाता है, लेकिन भारतीय संस्कृति में इस दिन का महत्व केवल विद्या तक सीमित नहीं है। शास्त्रों, लोक परंपराओं और प्रकृति के संकेतों के अनुसार वसंत पंचमी को प्रेम, अनुराग और भावनात्मक अभिव्यक्ति का भी विशेष दिन माना गया है। यही कारण है कि इसे भारत का प्राचीन ‘प्रेम दिवस’ या ‘भारतीय वैलेंटाइन डे’ भी कहा जाता है।

वसंत पंचमी का सबसे बड़ा रहस्य प्रकृति से जुड़ा है। इस दिन से वसंत ऋतु का औपचारिक आगमन माना जाता है। सर्दियों की कठोरता विदा लेने लगती है और प्रकृति मानो ‘सोलह श्रृंगार’ कर लेती है। पेड़-पौधों पर नई कोपलें फूटने लगती हैं, आम के पेड़ों पर बौर आने लगते हैं और सरसों के खेत पीली चादर ओढ़ लेते हैं। टेसू के लाल फूल, कोयल की मधुर कूक और भंवरों की गुंजन वातावरण में एक अनोखी मादकता भर देती है। यह वही समय होता है जब मनुष्य ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षी और पूरी सृष्टि उत्साह और उल्लास से भर उठती है। ऐसी मान्यता है कि जब पूरी प्रकृति प्रेम के रंग में रंगी हो, तब मनुष्य का हृदय भी स्वतः प्रेम की ओर आकर्षित होता है।

दूसरा बड़ा कारण पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा है। वसंत पंचमी को प्रेम के देवता कामदेव और उनकी पत्नी रति से संबंधित ‘मदनोत्सव’ का दिन माना जाता है। प्राचीन ग्रंथों और आयुर्वेदिक साहित्य जैसे चरक संहिता में उल्लेख मिलता है कि वसंत ऋतु में प्रकृति और यौवन दोनों अपने चरम पर होते हैं। मान्यता है कि इसी दिन कामदेव पृथ्वी पर आते हैं और प्रेम, आकर्षण व सृजन की ऊर्जा का संचार करते हैं। प्राचीन काल में इस अवसर पर कामोत्सव और मदनोत्सव मनाए जाते थे, जहां प्रेम की अभिव्यक्ति को सामाजिक स्वीकृति प्राप्त थी।

वृंदावन और बरसाना में वसंत पंचमी का विशेष महत्व है। राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और रासलीलाओं का स्मरण इस दिन किया जाता है, जो यह संदेश देता है कि प्रेम केवल भौतिक भावना नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक शक्ति भी है। इसी दिन पहली बार गुलाल उड़ाने और होली की तैयारियों की परंपरा भी शुरू होती है।

आज के संदर्भ में वसंत पंचमी हमें यह सिखाती है कि जीवन में ज्ञान और प्रेम दोनों का संतुलन आवश्यक है। जहां एक ओर हम मां सरस्वती से बुद्धि और विवेक की कामना करते हैं, वहीं दूसरी ओर वसंत की बयार हमें सिखाती है कि प्रेम, सौहार्द और मधुर व्यवहार के बिना जीवन अधूरा है। यही कारण है कि वसंत पंचमी को केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, आनंद और सकारात्मक ऊर्जा का उत्सव माना जाता है।

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