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धान खरीदी पर विधानसभा में घमासान, विपक्ष का वॉकआउट; भूपेश बघेल ने कहा—किसानों से हुई धोखाधड़ी

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में धान खरीदी का मुद्दा सोमवार को गरमा गया। इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

बस्तर क्षेत्र में किसानों से धान खरीदी नहीं होने का मामला उठाते हुए कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने सरकार से जवाब मांगा। इस पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि कुल 44,612 किसान धान खरीदी केंद्रों में धान बेचने के लिए आए ही नहीं।

मंत्री के जवाब पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया और धान खरीदी में गड़बड़ी तथा किसानों से जबरन समर्पण कराने का आरोप लगाया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार से मांग की कि समर्पण कराने वाले किसानों की वास्तविक संख्या स्पष्ट की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि धान खरीदी को लेकर किसानों के साथ धोखाधड़ी हुई है।

इस मुद्दे पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच काफी देर तक बहस चलती रही। हालांकि सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया।

वहीं कांग्रेस ने संकेत दिया है कि शून्यकाल के दौरान स्थगन प्रस्ताव लाकर अफीम की खेती से जुड़े मुद्दे को भी सदन में उठाया जाएगा।

धान खरीदी पर विपक्ष के सवाल, पक्ष का जवाब

सवाल (लखेश्वर बघेल):
बस्तर के 44 हजार से ज्यादा किसानों से धान नहीं खरीदा गया। इनमें कितने वन अधिकार पट्टाधारी हैं और कितने ऋणी व अऋणी किसान हैं?

जवाब (दयालदास बघेल):
ये किसान धान खरीदी केंद्रों में धान बेचने ही नहीं आए। पंजीयन कराने वाले सभी किसान अपना शत-प्रतिशत धान नहीं बेचते। जो किसान केंद्रों में पहुंचे, उनका धान खरीदा गया।

सवाल (लखेश्वर बघेल):
जो किसान कर्ज में है, वह धान बेचने क्यों नहीं जाएगा? यह सरकार की लचर व्यवस्था है। सबसे बड़ा घोटाला धान खरीदी में ही हुआ है।

सवाल (भूपेश बघेल):
सरकार बताए कितने किसानों ने धान जमा किया और कितनों ने नहीं किया। साथ ही यह भी बताएं कि कितने किसानों से जबरिया समर्पण कराया गया।

जवाब (दयालदास बघेल):
44,612 किसान धान खरीदी केंद्रों में नहीं आए। प्रश्न में समर्पण कराने वाले किसानों की संख्या नहीं पूछी गई थी।

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