छत्तीसगढ़

CG News : नई दिल्ली से उत्तर प्रदेश तक, यहां के टमाटर की बढ़ी मांग

CG News : परंपरागत धान की खेती के बजाय उद्यानिकी फसलों को अपनाने से किसानों की आमदनी कैसे बढ़ सकती है, इसकी मिसाल बने हैं राजनांदगांव जिले के किसान त्रवेंद्र साहू। छुरिया विकासखंड के ग्राम लाममेटा निवासी श्री साहू ने धान के बदले टमाटर की खेती कर न केवल अच्छी आमदनी हासिल की, बल्कि आर्थिक रूप से भी सशक्त बने हैं। शासन की राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना से मिले सहयोग ने उनकी किस्मत बदलने में अहम भूमिका निभाई है।

किसान त्रवेंद्र साहू को राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत लगभग 2 लाख 50 हजार रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ। इस राशि से उन्होंने 1.5 एकड़ भूमि में आधुनिक मल्चिंग पद्धति के माध्यम से टमाटर की खेती शुरू की। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली, उन्नत किस्म के टमाटर के पौधे, उर्वरक और कीटनाशकों का उपयोग किया, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

इस वर्ष टमाटर की बम्पर पैदावार होने से किसान को भरपूर लाभ मिला। श्री साहू ने बताया कि अब तक लगभग 10 लाख रुपए के टमाटर की बिक्री हो चुकी है, जिसमें से करीब 7 लाख रुपए का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि धान की तुलना में टमाटर की खेती कहीं अधिक लाभकारी साबित हुई है। शासन की योजनाओं से समय पर सहायता मिलने के कारण वे खेती में आधुनिक तकनीकों का प्रयोग कर पाए।

अधिक उत्पादन होने के कारण उनके खेतों में उगाया गया टमाटर न केवल स्थानीय बाजार, बल्कि राजनांदगांव के साथ-साथ नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश एवं अन्य राज्यों के बाजारों तक भेजा जा रहा है। अब तक लगभग 1000 कैरेट टमाटर की बिक्री की जा चुकी है। उन्होंने ‘परी’ किस्म के टमाटर का चयन किया, जिसकी बाजार में काफी मांग रही और बेहतर दाम भी मिले।

किसान त्रवेंद्र साहू ने बताया कि अभी भी टमाटर की तोड़ाई का कार्य जारी है और मार्च महीने तक अच्छी पैदावार मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि शासन की किसान हितैषी योजनाओं से प्रेरणा लेकर यदि किसान परंपरागत फसलों के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाएं और नई तकनीकों का उपयोग करें, तो खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है।

उनकी सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है, जो अब धान के विकल्प के रूप में सब्जी उत्पादन की ओर रुख कर रहे हैं।

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