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बस्तर में प्रसारण क्षमता बढ़ेगी: 39.70 करोड़ रुपये से चार नए एफएम ट्रांसमीटर लगाने को केंद्र की मंजूरी

बस्तर में प्रसारण कवरेज सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने नए एफएम ट्रांसमीटरों को मंजूरी दी

केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में रेडियो प्रसारण क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए 39.70 करोड़ रुपये की लागत से चार नए एफएम ट्रांसमीटर स्थापित करने को मंजूरी दी है। यह स्वीकृति ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड नेटवर्क डेवलपमेंट (Broadcasting Infrastructure and Network Development – BIND) योजना (2021–26) के अंतर्गत दी गई है।

सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने लोकसभा में यह जानकारी देते हुए बताया कि स्वीकृत परियोजनाओं के तहत जगदलपुर में 10 किलोवाट का एफएम ट्रांसमीटर, नारायणपुर और बैलाडीला में 5–5 किलोवाट के एफएम ट्रांसमीटर तथा कोंडागांव में 1 किलोवाट का एफएम ट्रांसमीटर स्थापित किया जाएगा। इन परियोजनाओं का उद्देश्य बस्तर संसदीय क्षेत्र, विशेष रूप से दूरस्थ और आदिवासी इलाकों में एफएम प्रसारण की पहुंच को और सुदृढ़ करना है।

मंत्री ने बताया कि यह जानकारी बस्तर के सांसद महेश कश्यप द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में दी गई, जिसमें क्षेत्र में आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन (Doordarshan) की प्रसारण क्षमता, कवरेज और विस्तार योजनाओं के बारे में जानकारी मांगी गई थी।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में बस्तर क्षेत्र में आकाशवाणी के चार केंद्र संचालित हो रहे हैं। इनमें जगदलपुर में पूर्ण विकसित केंद्र शामिल है, जहां 100 किलोवाट का मीडियम वेव (Medium Wave) ट्रांसमीटर और 100 वॉट का एफएम ट्रांसमीटर कार्यरत है। इसके अलावा नारायणपुर, बैलाडीला और कोंटा में 100–100 वॉट के एफएम रिले केंद्र संचालित हैं। जगदलपुर से होने वाला मीडियम वेव प्रसारण पूरे बस्तर संसदीय क्षेत्र को कवर करता है, जबकि एफएम ट्रांसमीटर लगभग 10 से 20 किलोमीटर के दायरे में प्रसारण सुविधा प्रदान करते हैं।

टेलीविजन प्रसारण के संबंध में मंत्री ने बताया कि दूरदर्शन छत्तीसगढ़ (DD Chhattisgarh) रायपुर से प्रसारित होने वाला 24 घंटे का चैनल है, जिसमें राज्य की कला, संस्कृति, विरासत, साहित्य, परंपराएं, समाचार और समसामयिक विषयों से जुड़े कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं। जगदलपुर स्थित प्रोग्राम जनरेटिंग फैसिलिटी (Programme Generating Facility) में तैयार कार्यक्रम विशेष रूप से स्थानीय आदिवासी समुदायों को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं।

मंत्री ने यह भी बताया कि दूरदर्शन की फ्री-टू-एयर डायरेक्ट-टू-होम सेवा (Free-to-Air Direct-to-Home) ‘डीडी फ्री डिश’ देशभर में उपलब्ध है, जिससे बस्तर के दूरस्थ, आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी दूरदर्शन चैनलों, आकाशवाणी चैनलों तथा शैक्षिक सामग्री तक पहुंच सुनिश्चित हो रही है।

इसके अतिरिक्त न्यूजऑनएयर (NewsOnAir) मोबाइल एप के माध्यम से आकाशवाणी के 260 से अधिक चैनल उपलब्ध हैं, जबकि प्रसार भारती (Prasar Bharati) का ओवर-द-टॉप (Over-The-Top) प्लेटफॉर्म ‘वेव्स (WAVES)’, जिसे वर्ष 2024 में शुरू किया गया, दूरदर्शन और आकाशवाणी के चैनलों को एकीकृत कर डिजिटल माध्यम से प्रसारण की पहुंच को और व्यापक बना रहा है।

सरकार ने दोहराया कि बस्तर क्षेत्र में संचार अवसंरचना को मजबूत करने और गोंडी, हल्बी तथा भतरी जैसी स्थानीय आदिवासी बोलियों में कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों का प्रसारण भी प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों तक महत्वपूर्ण जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

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