FTV क्लब में बाल-बाल बची जान! सिर से चंद इंच दूर गिरी भारी लोहे की रेलिंग, कस्टमर घायल; संचालक के खिलाफ FIR
घटना ने क्लब की सुरक्षा और CCTV व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल; फुटेज सुरक्षित कर निष्पक्ष जांच की मांग

रायपुर: तेलीबांधा स्थित FTV Club/Lounge में 8 अगस्त की रात एक भारी लोहे की रेलिंग गिरने की घटना सामने आई है। शिकायतकर्ता विकास अग्रवाल के अनुसार, क्लब की पहली मंजिल की ओर से अचानक रेलिंग नीचे आ गिरी। रेलिंग उनके सिर से महज कुछ इंच की दूरी से निकल गई, जबकि दोनों हाथों में चोटें आईं। शिकायत में आशंका जताई गई है कि रेलिंग सीधे सिर पर गिरती तो घटना गंभीर अथवा जानलेवा हो सकती थी। मामले में तेलीबांधा पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक घटना रात करीब 11 से 11.15 बजे के बीच हुई। प्राथमिकी में आरोपी अथवा संदिग्ध के विवरण में FTV क्लब के संचालक का उल्लेख किया गया है। घटना के बाद शिकायतकर्ता का चिकित्सकीय परीक्षण भी कराया गया, जिसमें चोटें दर्ज की गई हैं।
CCTV फुटेज को लेकर उठे सवाल
घटना के बाद सबसे अहम सवाल क्लब परिसर में लगे CCTV कैमरों और उनकी रिकॉर्डिंग को लेकर उठ रहा है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से CCTV फुटेज सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित कर जांच में शामिल करने की मांग की है। यदि घटना CCTV में रिकॉर्ड हुई है तो फुटेज को तत्काल सुरक्षित किया जाना आवश्यक है। वहीं, यदि कैमरे मौजूद होने के बावजूद घटना के समय रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं है, तो इसके कारणों की भी जांच की जरूरत है।
जांच में DVR/NVR, हार्ड डिस्क और उपलब्ध बैकअप की तकनीकी एवं फॉरेंसिक जांच से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि घटना रिकॉर्ड हुई थी अथवा नहीं और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ तो नहीं हुई।
रेलिंग गिरने के कारण की जांच जरूरी
घटना में भारी लोहे की रेलिंग के अचानक नीचे गिरने को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। पुलिस और संबंधित विशेषज्ञों द्वारा रेलिंग की वेल्डिंग, एंकरिंग, फैब्रिकेशन तथा रखरखाव की स्थिति की जांच की जा सकती है। यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि रेलिंग का निर्माण और स्थापना किस एजेंसी अथवा ठेकेदार ने की थी तथा उसकी सुरक्षा जांच कब और किस स्तर पर की गई थी।
शिकायतकर्ता ने इस संभावना की भी जांच की मांग की है कि रेलिंग दुर्घटनावश गिरी या किसी व्यक्ति के हस्तक्षेप के कारण नीचे आई। हालांकि, जानबूझकर रेलिंग गिराए जाने की बात फिलहाल सिद्ध नहीं है। इस संबंध में घटना से पहले ऊपरी हिस्से में मौजूद लोगों, प्रत्यक्षदर्शियों, CCTV फुटेज और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सुरक्षा व्यवस्था की भी होगी अहम भूमिका
घटना ने क्लब की समग्र सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। CCTV की निगरानी, सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती, प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश नियंत्रण, आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था तथा भवन की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। घटना के बाद गिरी रेलिंग, उसके फिक्सिंग प्वाइंट और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को किस प्रकार सुरक्षित रखा गया, यह भी जांच का हिस्सा होना चाहिए।
इसके साथ ही संबंधित विभागों द्वारा क्लब की वैध अनुमतियों और लाइसेंस की भी जांच की जा सकती है। इसमें आबकारी लाइसेंस, संचालन संबंधी अनुमति, लाइसेंस की शर्तों, निर्धारित समय में संचालन, आयु सत्यापन तथा अन्य लागू नियमों के अनुपालन की पुष्टि शामिल हो सकती है। उपलब्ध प्राथमिकी और शिकायत से किसी आबकारी उल्लंघन की पुष्टि नहीं होती है।
क्लब प्रबंधन मौन
मामले में घटना के वास्तविक कारण और जिम्मेदारी का निर्धारण पुलिस तथा संबंधित विभागों की जांच के बाद ही हो सकेगा। ऐसे में क्लब प्रबंधन का पक्ष भी सामने आना आवश्यक है लेकिन वो मामला दबाने का प्रयास कर रहे है। जांच के दौरान CCTV रिकॉर्ड, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, चिकित्सकीय दस्तावेज, रेलिंग की तकनीकी स्थिति तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल से घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकती हैं।
घटना ने रायपुर के क्लब, बार और अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा, निगरानी और संरचनात्मक मानकों के पालन को लेकर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। सवाल अब यह है कि क्या सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच और निगरानी प्रभावी तरीके से हो रही है और किसी अप्रिय घटना की स्थिति में आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक एवं भौतिक साक्ष्य तत्काल उपलब्ध हो पाते हैं।


