नकली दवा मामले में बड़ी कार्रवाई: एडिशनल ड्रग कंट्रोलर संजय नेताम निलंबित, आरोपी से रेस्टोरेंट में मुलाकात, स्टिंग ऑपरेशन सामने आने के बाद हुई कार्रवाई

रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए एडिशनल ड्रग कंट्रोलर (एडीसी) संजय कुमार नेताम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई नकली दवा कारोबार से जुड़े आरोपी से उनकी मुलाकात और कथित स्टिंग ऑपरेशन सामने आने के बाद की गई है।
जारी आदेश के अनुसार, संजय कुमार नेताम, जो उस समय सहायक औषधि नियंत्रक के पद पर पदस्थ थे, पर आरोप है कि उन्होंने नकली दवा प्रकरण के आरोपी सारंगढ़ निवासी खेमराज (खेमराम) बानी से मोतीबाग स्थित एक रेस्टोरेंट (टेन कैफे/कॉफी हाउस) में कार्यालयीन समय के दौरान मुलाकात की। यह मुलाकात दोपहर करीब ढाई बजे हुई बताई गई है। आदेश में उल्लेख है कि बैठक के दौरान नकली दवाओं से संबंधित फाइल दिखाए जाने की बात भी सामने आई और यह पूरा मामला दैनिक समाचार पत्रों एवं न्यूज चैनलों में प्रसारित हुआ।
बताया जा रहा है कि एडीसी और आरोपी खेमराम बानी की मुलाकात का स्टिंग ऑपरेशन भी हुआ था, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया। इस दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी राखी सिंह ठाकुर भी मौके पर मौजूद थीं। शासन ने इस पूरे घटनाक्रम को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 का उल्लंघन माना है।

राज्य शासन द्वारा जारी आदेश क्रमांक ESTB/4219/2026-HEALTH SECTION-2, दिनांक 10 फरवरी 2026 के तहत संजय कुमार नेताम को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9(1)(क) के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, नया रायपुर अटल नगर निर्धारित किया गया है। उन्हें सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
इसी प्रकरण में खाद्य सुरक्षा अधिकारी राखी सिंह ठाकुर को भी जशपुर भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के संबंध में अलग से आदेश जारी किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
नकली दवाओं के कारोबार से जुड़े मामले पहले से ही संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारी की आरोपी से कथित मुलाकात ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शासन की इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। अब इस पूरे मामले में विभागीय जांच की दिशा और परिणाम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
