पर्व विशेष : मौनी अमावस्या का दुर्लभ संयोग-पितृ दोष दूर कर सुख-समृध्दि देगा, करें ये खास उपाए

मौनी अमावस्या : मौनी अमावस्या एक अत्यंत पावन और आध्यात्मिक तिथि है। माघ महीने के कृष्ण पक्ष की इस अमावस्या का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि इसे ‘मौन’ साधना और आत्म-मंथन का दिन माना गया है। मौनी अमावस्या पर पितृ तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और मौन व्रत रखने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।18 जनवरी, रविवार को मौनी अमावस्या पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जो पितृ दोष से मुक्ति और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष फलदायी हैं। मान्यताओं के अनुसार इस दिन पितरों की पूजा और तर्पण करने से वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। शास्त्रों में कहा गया है कि मौनी अमावस्या का तर्पण कई गुना फल देने वाला होता है।
इस बार मौनी अमावस्या पर मकर राशि में मंगल, बुध, शुक्र और सूर्य का चतुर्ग्रही योग बन रहा है। साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बना हुआ है। माघ या मौनी अमावस्या के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। हो सके तो पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करें। 1 स्टील या तांबे के लोटे में जल, काले तिल, कुशा, जौ और थोड़ा सा दूध मिलाएं। अपने पितरों का नाम लेकर श्रद्धा से उनका ध्यान करें। हाथ में जल लेकर अंगूठे और तर्जनी के बीच से धीरे-धीरे जल गिराते हुए तर्पण करें। इस समय ‘ॐ पितृ देवतायै नमः’ या ‘ॐ पितृभ्यो नमः’मंत्र का जप करें। तथा तर्पण के बाद अन्न, वस्त्र या दक्षिणा का दान करें, यह अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही इस मंत्र का जाप भी कर सकते हैं- मंत्र- ‘ॐ आगच्छन्तु में पितर इमं गृहन्तु जलान्जिलम’ अर्थात्- मेरे पितर आओ, मेरे द्वारा देने वाली जलांजलि को ग्रहण करो।
इस अवसर पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण किया जाता है, क्योंकि यह दिशा पितरों की मानी जाती है। इस तरह पितृ तर्पण करने से वे प्रसन्न होकर शुभाशीष देते हैं। यदि किसी कारणवश नदी तट पर तर्पण संभव न हो, तो घर पर साफ स्थान में भी श्रद्धा और नियम के साथ तर्पण किया जा सकता है। भावना और श्रद्धा सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।घर के दक्षिण कोने में घी का दीपक जलाकर पितरों का स्मरण करें।
मौनी अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा करना अत्यंत शुभ है। पीपल के जड़ में जल अर्पित करें और सात बार परिक्रमा करें। माना जाता है कि पीपल में देवताओं के साथ-साथ पितरों का भी वास होता है।
इस दिन काले तिल, गुड़, वस्त्र और अनाज का दान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। काले तिल को जल में डालकर स्नान करने का भी विशेष महत्व है।
इस दिन मौन रहने की परंपरा है। मौन रहने से मानसिक शक्ति बढ़ती है और एकाग्रता आती है। यदि पूरे दिन संभव न हो, तो कम से कम स्नान और पूजा के समय मौन अवश्य रखें।
पितृ दोष के अलावा, जीवन में सुख-शांति के लिए इस दिन शाम को घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में गाय के घी का दीपक जलाएं। दीपक में थोड़ी केसर या हल्दी डालें, इससे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और आर्थिक तंगी दूर होती है। मौनी अमावस्या का यह पर्व हमें अनुशासन और सेवा का संदेश देता है। निस्वार्थ भाव से किया गया दान और पितरों के प्रति श्रद्धा न केवल हमारे कष्टों को कम करती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सौभाग्य का मार्ग प्रशस्त करती है।