खुद को स्वास्थ्य विभाग का अधिकारी बता कर निजी अस्पतालों से कर रहा था वसूली, स्वास्थ्य सचिव ने कमिश्नर को पत्र लिखकर की शिकायत
शिकायतों का डर दिखाकर ठगी, संगठित गिरोह ने बनाए निजी अस्पतालों को निशाना..... आयुष्मान एंपैनलमेंट के नाम पर धोखाधड़ी, ज्यादातर छोटे अस्पताल फंसे जाल में

रायपुर। राजधानी में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां खुद को स्वास्थ्य विभाग का अधिकारी बताकर निजी अस्पतालों से वसूली की जा रही है। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने इस गंभीर मामले को लेकर पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के अनुसार, एक अज्ञात व्यक्ति अजय अग्रवाल बनकर अस्पताल संचालकों को फोन करता है और उनके संस्थान के खिलाफ कथित शिकायतों का डर दिखाकर मानसिक दबाव बनाता है। वह मामलों को निपटाने के नाम पर अप्रत्यक्ष रूप से पैसे की मांग करता है और कुछ लोगों को मंत्रालय बुलाकर भी गुमराह करता है। इस संगठित गिरोह की गतिविधियों ने स्वास्थ्य विभाग की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसे लेकर प्रशासन अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।
फर्जी कॉल करने वाला विभाग का कर्मचारी नहीं
स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने स्पष्ट किया है कि फर्जी कॉल करने वाला व्यक्ति विभाग का कर्मचारी नहीं है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, मंत्रालय या उनके निजी स्थापना में अजय अग्रवाल नाम का कोई व्यक्ति कार्यरत नहीं है। प्रथम दृष्टया यह मामला उनके नाम और पद के दुरुपयोग का है, जिसके जरिए अवैध लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ विभाग की साख को नुकसान पहुंचा रही हैं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत छवि को भी प्रभावित कर रही हैं, जिस पर अब सख्त कार्रवाई की तैयारी है।
संगठित गिरोह द्वारा इन निजी अस्पतालों को बनाया टारगेट
इस मामले में ए.एम. हॉस्पिटल, चरौदा (भिलाई) के संचालक डॉ. मनोज पोपटनी और गंगोत्री अस्पताल, दुर्ग के संचालक डॉ. ओम प्रकाश कराडे ने इस संबंध में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। इसके अलावा एस.आर. अस्पताल, भिलाई, आर.बी. अस्पताल, बिलासपुर और हाईटेक अस्पताल से भी इसी तरह की शिकायतें मिली हैं। लगातार सामने आ रहे मामलों से साफ है कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा एक बड़ा फर्जीवाड़ा है, जिसमें निजी अस्पतालों को निशाना बनाया जा रहा है।
शिकायत रफा- दफा करने के नाम पर कर रहे थे वसूली
स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयुष्मान योजना या अन्य शिकायतों पर जिन अस्पतालों को कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किए गए थे, उन्हीं नोटिसों का डर दिखाकर एक फर्जी गिरोह ने संगठित तरीके से वसूली का खेल खड़ा कर दिया। शिकायतों को रफा-दफा कराने का झांसा देकर यह गिरोह अब तक दर्जनों अस्पताल संचालकों से मोटी रकम ऐंठ चुका है, जिससे पूरे स्वास्थ्य तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
आयुष्मान एंपैनलमेंट के नाम पर ठगी, ज्यादातर छोटे अस्पतालों को बनाया शिकार
इतना ही नहीं आयुष्मान योजना में एंपैनलमेंट और बकाया भुगतान दिलाने का लालच देकर अजय अग्रवाल ने छोटे अस्पताल संचालकों को निशाना बनाया और उनसे ठगी की। खुद को स्वास्थ्य विभाग का अधिकारी बताकर उसने लाइसेंस दिलाने, भुगतान जारी कराने और शिकायतें खत्म कराने जैसे झूठे वादे किए। चौंकाने वाली बात यह है कि बिना वैध लाइसेंस वाले अस्पताल भी इस जाल में फंस गए। डर और बदनामी के कारण अब तक कई पीड़ित संचालक सामने आने से बच रहे हैं।
मामला उजागर होने के बाद आरोपी ने किया नंबर बंद
मामला उजागर होते ही आरोपी अजय अग्रवाल ने अपने दोनों मोबाइल नंबर बंद कर लिए और फरार हो गया। ठगी की शिकायत सामने आने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसकी तलाश शुरू कर दी है। तकनीकी साक्ष्यों और पीड़ितों के बयानों के आधार पर आरोपी की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश जारी है।