6G के भविष्य की दिशा तय करेगा भारत: ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताए चार प्रमुख स्तंभ

नई दिल्ली: केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा है कि 6G तकनीक का भविष्य चार प्रमुख स्तंभों—इंटरऑपरेबिलिटी, साझा मानक, नवाचार और समावेशी विकास—पर आधारित होना चाहिए।
विज्ञान भवन में आयोजित 6G स्टैंडर्डाइजेशन पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक दूरसंचार संरचना को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2022 में ‘भारत 6G एलायंस’ की स्थापना की गई थी, जिसका उद्देश्य भारत की 6G विजन को आगे बढ़ाना है। सिंधिया ने कहा कि भारत का लक्ष्य 6G के विकास में वैश्विक मानकों और पेटेंट्स में कम से कम 10 प्रतिशत योगदान देना है।

कार्यशाला का आयोजन टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग सेंटर (TEC) द्वारा किया गया, जिसमें दुनियाभर के विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षाविद और नीति निर्माता शामिल हुए। इस दौरान 6G इकोसिस्टम से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा की गई।
कार्यक्रम में वैश्विक मानकीकरण, नेटवर्क आर्किटेक्चर, स्पेक्ट्रम प्लानिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सुरक्षा ढांचे जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। साथ ही भविष्य के 6G नेटवर्क में AI आधारित सिस्टम, ओपन RAN, क्लाउड-नेटिव आर्किटेक्चर और नई एप्लिकेशन संभावनाओं को प्रमुख आधार माना गया।
सिंधिया ने कहा कि 6G केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि अवसरों के लोकतंत्रीकरण का माध्यम भी होगा, जिससे दुनिया के हर व्यक्ति तक तकनीक का लाभ पहुंचाया जा सकेगा।
कार्यशाला में भारत की वैश्विक संस्थाओं जैसे अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) और 3rd Generation Partnership Project (3GPP) के साथ सक्रिय भागीदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
विशेषज्ञों ने इस बात पर भी बल दिया कि भारतीय शोधकर्ता, स्टार्टअप और तकनीकी नवप्रवर्तक 6G के वैश्विक विकास और मानकीकरण प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम में यह स्पष्ट किया गया कि 6G तकनीक IMT-2030 फ्रेमवर्क के तहत विकसित होगी, जो भविष्य में स्मार्ट, सुरक्षित और सर्वव्यापी कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगी।

