CG News : रायपुर साहित्य उत्सव में ओपन माइक मंच सजा, 75 से अधिक प्रतिभाओं ने बिखेरा सृजन का रंग

रायपुर : रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत प्रदेश के लब्ध प्रतिष्ठित कवि पद्मश्री स्वर्गीय सुरेन्द्र दुबे को समर्पित ओपन माइक मंच का आयोजन उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। उत्सव के पहले दिन आयोजित चार अलग-अलग सत्रों में 75 से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी सृजनात्मक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। यह मंच साहित्य, संगीत और नृत्य की विविध विधाओं को समर्पित रहा, जहाँ प्रतिभाओं ने अपनी अभिव्यक्ति को खुले दिल से प्रस्तुत किया।
ओपन माइक मंच का उद्देश्य नवोदित और स्थापित दोनों प्रकार के कलाकारों को समान अवसर प्रदान करना था। कविता, कहानी पाठ, ग़ज़ल, गायन, वादन, सामूहिक नृत्य एवं शास्त्रीय नृत्य जैसी विधाओं में प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों—सरगुजा, बस्तर, बिलासपुर, दुर्ग और रायगढ़—से आए युवा रचनाकारों ने अपनी मौलिक रचनाओं के माध्यम से समसामयिक विषयों, सामाजिक सरोकारों और सांस्कृतिक मूल्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
इस मंच की विशेषता यह रही कि इसमें पड़ोसी राज्यों से आए प्रतिभागियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। विविध पृष्ठभूमि से आए कलाकारों ने अपनी विशिष्ट शैली से कार्यक्रम को बहुरंगी बना दिया। बाँसुरी, गिटार और वायलिन वादन की प्रस्तुतियों ने वातावरण को मधुर और संगीतमय बना दिया। शास्त्रीय और लोक नृत्य की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नन्ही नृत्यांगनाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

युवा कवियों और ग़ज़लकारों ने अपनी सशक्त अभिव्यक्ति से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कई रचनाओं में समाज की बदलती परिस्थितियों, युवा आकांक्षाओं और मानवीय संवेदनाओं का प्रभावी चित्रण देखने को मिला। ओपन माइक मंच ने प्रतिभागियों को न केवल अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर दिया, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ बड़े मंच पर प्रस्तुत होने का अनुभव भी प्रदान किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, महंत कॉलेज के प्राचार्य देवाशीष महंत तथा संयुक्त संचालक, जनसंपर्क इस्मत जहाँ दानी द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किए गए। अतिथियों ने प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन से युवाओं की रचनात्मक ऊर्जा को नई दिशा मिलती है और साहित्य-संस्कृति के प्रति उनका जुड़ाव सशक्त होता है।
ओपन माइक सत्र ने यह सिद्ध किया कि छत्तीसगढ़ की धरती प्रतिभाओं से समृद्ध है। रायपुर साहित्य उत्सव का यह मंच नवोदित कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरा है। इस आयोजन ने न केवल कला और साहित्य के विविध आयामों को उजागर किया, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक जीवंतता और युवाओं की सृजनात्मक क्षमता को भी प्रभावी रूप से सामने रखा। उत्सव के आगामी सत्रों को लेकर प्रतिभागियों और दर्शकों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
