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भारत-अमेरिका ट्रेड डील से बदलेगा खेल, टैरिफ कटौती से भारतीय निर्यात को नई उड़ान

भारत-अमेरिका के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) ने एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर सहमति जताई है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस महत्वपूर्ण समझौते की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई फोन वार्ता के बाद की।

टैरिफ में भारी कटौती
इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगने वाली टैरिफ दर को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, जिसे भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इसके साथ ही रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाए गए अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क को भी अमेरिका ने हटा लिया है। नई टैरिफ व्यवस्था दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे इंडोनेशिया, बांग्लादेश, वियतनाम और चीन की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी मानी जा रही है, जिससे भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी।

क्या बदला और क्या देंगे दोनों देश
भारत की ओर से इस समझौते के तहत रूस से कच्चे तेल की खरीद को रोकने और अमेरिका से ऊर्जा, विमानन, रक्षा तथा तकनीकी उपकरणों की खरीद बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई गई है। इसके अलावा भारत अमेरिकी कृषि और अन्य उत्पादों के लिए कुछ क्षेत्रों में बाजार खोलने पर भी विचार कर रहा है, हालांकि इस पर औपचारिक घोषणा अभी बाकी है।

वहीं अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं के लिए अपने बाजार में कम टैरिफ की सुविधा देने पर सहमति जताई है। इससे विशेष रूप से कपड़ा, ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग सामान, समुद्री उत्पाद और उपभोक्ता वस्तुओं से जुड़े क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।

आर्थिक और बाजार पर असर
व्यापार समझौते की घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजार और रुपये में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। निफ्टी-50 सूचकांक में तेज उछाल दर्ज किया गया, जबकि रुपये में भी मजबूती आई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता निवेशकों का भरोसा बढ़ाएगा, विदेशी पूंजी आकर्षित करेगा और निर्यात आधारित उद्योगों को नई गति देगा।

प्रतिक्रियाएँ और विश्लेषण
भारतीय वाणिज्य मंत्री ने कहा कि यह समझौता किसानों, एमएसएमई, उद्योगों और कुशल कार्यबल के लिए नए अवसर खोलेगा तथा ‘मेक इन इंडिया’ पहल को वैश्विक मंच पर और मजबूत करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी का मजबूत प्रतीक भी है।

क्या अभी सब कुछ तय हो गया है?
हालांकि समझौते की मूल सहमति बन चुकी है, लेकिन उत्पादों की अंतिम सूची, कार्यान्वयन की प्रक्रिया और समय-सीमा जैसे कई तकनीकी विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कुछ महीनों में इस व्यापार समझौते पर कानूनी रूप से हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

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