अंगदान माह में छत्तीसगढ़ का 15वां अंगदान, ब्रेन डेथ के बाद आश्विन राठौर की किडनी से बुजुर्ग को मिली जीने की आस
परिजनों के मानवीय निर्णय ने दिया जीवनदान, अंगदान के प्रति समाज को मिला प्रेरक संदेश

रायपुर: अंगदान माह के दौरान छत्तीसगढ़ में मानवता और सेवा का एक प्रेरक उदाहरण सामने आया है। रायपुर के देवेंद्र नगर निवासी 59 वर्षीय आश्विन कुमार राठौर के ब्रेन डेथ घोषित होने के बाद उनके परिजनों की सहमति से उनकी एक किडनी का सफल प्रत्यारोपण 67 वर्षीय बुजुर्ग मरीज में किया गया। इस सफल प्रत्यारोपण के साथ ही राज्य में वर्ष का 15वां अंगदान संपन्न हुआ।
आश्विन कुमार राठौर अपने परिवार के साथ रायपुर के देवेंद्र नगर में निवास करते थे और क्राफ्ट व्यवसाय से जुड़े थे। वे अपने सरल स्वभाव, सेवा भावना तथा विशेष रूप से बुजुर्गों के प्रति संवेदनशील व्यवहार के लिए जाने जाते थे। उनके पुत्र के अनुसार, वे जरूरतमंदों और विशेषकर बुजुर्गों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते थे। जीवनभर दूसरों की मदद करने वाले आश्विन कुमार राठौर ने अपने निधन के बाद भी अंगदान के माध्यम से एक जरूरतमंद को नया जीवन देने का संदेश दिया।
रविवार रात अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर में भर्ती कराया गया। चिकित्सकीय जांच में उनका रक्तचाप अत्यधिक बढ़ा हुआ पाया गया तथा मस्तिष्क में आंतरिक रक्तस्राव की पुष्टि हुई। विशेषज्ञ चिकित्सकों के निरंतर प्रयासों के बावजूद उन्हें ब्रेन डेथ घोषित करना पड़ा।
इस कठिन समय में उनके परिजनों ने उल्लेखनीय संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय देते हुए बुधवार शाम अंगदान के लिए सहमति प्रदान की। इसके बाद उनकी एक किडनी का सफल प्रत्यारोपण 67 वर्षीय बुजुर्ग मरीज में किया गया, जिससे मरीज को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी।

अंगदान और प्रत्यारोपण की संपूर्ण प्रक्रिया को सफल बनाने में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर की विशेषज्ञ टीमों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मूत्ररोग विभाग (यूरोलॉजी विभाग) से डॉ. अमित शर्मा, डॉ. दीपक बिस्वाल, डॉ. सत्यदेव शर्मा और डॉ. राघवेंद्र, नेफ्रोलॉजी विभाग से डॉ. नीलम देवी मरावी, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. शेफाली तथा प्रत्यारोपण समन्वयक विशोक एन., विनीता पटेल और अंबे पटेल ने इस प्रक्रिया में उल्लेखनीय योगदान दिया।
वहीं, छत्तीसगढ़ शासन के स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोट्टो), छत्तीसगढ़ के संयुक्त संचालक डॉ. वरुण अग्रवाल तथा कंसल्टेंट गीतिका ब्रम्हभट्ट त्रिपाठी ने अंगदान एवं प्रत्यारोपण प्रक्रिया के समन्वय और सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अंगदान माह के दौरान संपन्न हुआ यह 15वां अंगदान न केवल एक मरीज के लिए जीवनदायी साबित हुआ, बल्कि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को भी सशक्त संदेश देने वाला उदाहरण बना है। आश्विन कुमार राठौर और उनके परिवार का यह निर्णय अंगदान के महत्व को रेखांकित करते हुए समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। “अंगदान-महादान” की भावना को साकार करने वाला यह निर्णय अनेक लोगों को जीवनदान के इस महाअभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगा।