मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर खाद-बीज की निर्बाध उपलब्धता, कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई
खरीफ सीजन में डीएपी की सीमित राष्ट्रीय उपलब्धता के बावजूद किसानों के लिए प्रभावी व्यवस्था

रायपुर: खरीफ सीजन 2026 में डीएपी की राष्ट्रीय स्तर पर सीमित उपलब्धता के बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने और उर्वरकों की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए लगातार निगरानी कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर कृषि विभाग प्रदेशभर में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण और मूल्य नियंत्रण पर विशेष अभियान चला रहा है।
कृषि विभाग के अनुसार, खरीफ 2026 के लिए डीएपी का लक्ष्य 3 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है। 21 जुलाई 2026 तक प्रदेश में 1,84,413 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण किया गया, जिसमें से किसानों को 1,26,360 मीट्रिक टन वितरित किया जा चुका है। इसके बाद भी समितियों और गोदामों में 58,054 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। पिछले वर्ष इसी अवधि में केवल 37,535 मीट्रिक टन डीएपी शेष था।
विभाग ने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के अनुरूप किसानों को डीएपी के साथ-साथ एनपीके और अन्य संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि फसलों की पोषण आवश्यकताओं की पूर्ति हो और डीएपी पर अत्यधिक निर्भरता कम हो।
अधिकारियों के अनुसार, देश में डीएपी का लगभग 70 से 80 प्रतिशत तथा एनपीके का 30 से 40 प्रतिशत आयात विदेशों से किया जाता है। वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने से इन उर्वरकों की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ा है। इसी के चलते उर्वरक कंपनियों ने भारत सरकार की नीति और बाजार परिस्थितियों के अनुरूप एनपीके के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में वृद्धि की है।
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों के मूल्य निर्धारित करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, लेकिन किसानों से निर्धारित एमआरपी से अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतों पर लगातार निरीक्षण और कार्रवाई की जा रही है। अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी और कृत्रिम अभाव उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है।
अब तक प्रदेश में 4,878 उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण किया गया है। जांच के दौरान 625 नोटिस जारी किए गए, 183 केंद्रों पर विक्रय प्रतिबंध लगाया गया और 98 केंद्रों से उर्वरक जब्त किए गए। इसके अलावा 97 केंद्रों के लाइसेंस निलंबित, 11 लाइसेंस निरस्त किए गए, 56 प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किए गए तथा 7 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई।
भारी वर्षा से जिन क्षेत्रों में बोनी प्रभावित हुई है या किसानों को दोबारा बुआई करनी पड़ रही है, वहां जिला प्रशासन और कृषि विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रभावित किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, बीज और उर्वरक उपलब्ध कराने के साथ शासन के प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक सहायता भी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था, मूल्य नियंत्रण और कालाबाजारी पर प्रभावी निगरानी बनाए हुए है।
राज्य शासन ने किसानों से केवल अधिकृत विक्रेताओं और सहकारी समितियों से निर्धारित मूल्य पर उर्वरक खरीदने की अपील की है। साथ ही अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी या अन्य अनियमितता की जानकारी मिलने पर तत्काल कृषि विभाग या जिला प्रशासन को सूचित करने का आग्रह किया गया है, ताकि दोषियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की जा सके।

