छत्तीसगढ़

कांकेर के किसान प्रवीण देहरी को मिला ICAR का ‘इनोवेटिव फार्मर अवार्ड 2025-26’, कम लागत, ऊर्जा-कुशल अंडा इनक्यूबेटर विकसित कर किया सफल व्यावसाय

कड़कनाथ समेत विभिन्न मुर्गी नस्लों के लिए विकसित मशीन से किसानों को मिला लाभ, वार्षिक आय 18–24 लाख रुपये तक पहुंची*

उत्तर बस्तर कांकेर जिले के राजापारा निवासी प्रगतिशील किसान प्रवीण देहरी को कृषि क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता के लिए प्रतिष्ठित ‘इनोवेटिव फार्मर अवार्ड 2025-26’ से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research-ICAR) के राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी (National Academy of Agricultural Research Management-NAARM), हैदराबाद के स्वर्ण जयंती समारोह एवं 51वें स्थापना दिवस के अवसर पर डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन सभागार में प्रदान किया गया। प्रवीण देहरी को इस पुरस्कार के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (ICAR-NIBSM), रायपुर के निदेशक ने नामांकित किया था।

पुरस्कार समारोह में ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (TAAS) के अध्यक्ष एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (Department of Agricultural Research and Education-DARE) के पूर्व सचिव तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक पद्म भूषण डॉ. आर. एस. परोदा, समारोह के अध्यक्ष कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (कृषि शिक्षा) डॉ. यशपाल सिंह मलिक, कृषि शिक्षा प्रभाग की सहायक महानिदेशक (मानव संसाधन विकास) डॉ. सीमा जग्गी तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद के निदेशक डॉ. रमन मीनाक्षी सुंदरम सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

प्रवीण देहरी ने कड़कनाथ सहित विभिन्न मुर्गी नस्लों के लिए कम लागत और ऊर्जा-कुशल अंडा इनक्यूबेटर-सह-हैचिंग मशीन विकसित की है और उसका सफल व्यावसायीकरण भी किया है। स्थानीय स्तर पर निर्मित इस मशीन में एक बैच में 800 अंडों को रखने की क्षमता है तथा इसकी औसत हैचिंग क्षमता करीब 85 प्रतिशत है। मशीन में अंडों को स्वचालित रूप से घुमाने के साथ तापमान और आर्द्रता नियंत्रण जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ग्रामीण परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित यह मशीन पोर्टेबल, सरल और उपयोग में सुविधाजनक है।

इस नवाचार को किसानों के बीच व्यापक स्वीकार्यता मिली है। अब तक 54 से अधिक मशीनों की बिक्री हो चुकी है तथा कांकेर और आसपास के जिलों में करीब 230 से 450 किसानों ने इस तकनीक को अपनाया है। इससे चूजा उत्पादन और हैचिंग प्रक्रिया में सुधार के साथ व्यावसायिक हैचरी पर किसानों की निर्भरता कम हुई है। मशीन के व्यावसायीकरण के बाद प्रवीण देहरी की वार्षिक आय लगभग 3–7 लाख रुपये से बढ़कर 18–24 लाख रुपये तक पहुंच गई है। करीब 60 हजार रुपये की लागत वाली यह मशीन छोटे एवं मध्यम पोल्ट्री किसानों के साथ स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups-SHGs) और किसान उत्पादक संगठनों (Farmer Producer Organisations-FPOs) के लिए भी उपयोगी है।

इस नवाचार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय कृषि विज्ञान निधि (ICAR-NASF) परियोजना के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार राय के मार्गदर्शन तथा वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान अन्वेषक डॉ. पी. मूवेनथन के नेतृत्व में समर्थन और प्रलेखन प्राप्त हुआ।

समारोह के दौरान ‘Farmers VAULT’ पोर्टल का भी लोकार्पण किया गया। प्रवीण देहरी इससे पहले कृषि रत्न पुरस्कार और इनोवेटिव कृषि वैज्ञानिक अवार्ड से भी सम्मानित हो चुके हैं। उनके नवाचार ने स्थानीय संसाधनों और तकनीकी समाधान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में कृषि आधारित उद्यमिता को नई दिशा दी है।

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