छत्तीसगढ़

बस्तर पंडुम 2026: मंत्रमुग्ध हुए अमित शाह – बच्चों की प्रस्तुति से लेकर जनजातीय विरासत तक, बस्तर की संस्कृति का भव्य प्रदर्शन

जगदलपुर: संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह ने बस्तर की संस्कृति, कला और जनजातीय विरासत का अनूठा वैभव एक ही मंच पर समेट लिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बच्चों की प्रस्तुति और जनजातीय प्रदर्शनी से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कई बार तालियां बजाकर उत्साहवर्धन किया।

समारोह में जब हजारों स्कूली बच्चों ने स्वागत में प्रस्तुत किया गीत “ऐसा जादू है मेरे बस्तर में”, पूरा लालबाग मैदान रोमांचित हो उठा। हिंदी और हल्बी में रचा गया यह गीत बादल अकादमी और दायरा बैंड की प्रस्तुति के साथ और भी मनमोहक बन गया। बच्चों की अनुशासित और भावपूर्ण प्रस्तुति देखकर केंद्रीय गृह मंत्री भी भावुक हो उठे और मंच से खड़े होकर तालियां बजाईं।

बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत मलखंभ प्रदर्शन ने भी जनसमूह की खूब वाहवाही लूटी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी बच्चों की हौसला-अफजाई की।

इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री ने जनजातीय प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसमें ढोकरा शिल्प, बांस एवं लौह कला, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, जनजातीय वेशभूषा, आभूषण और चित्रकला जैसी समृद्ध परंपराओं की झलक प्रस्तुत की गई थी। उन्होंने कहा कि- “बस्तर की संस्कृति भारत की आत्मा का जीवंत स्वरूप है”।

प्रदर्शनी में दंडामी माड़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा और हल्बा जनजातियों की पारंपरिक जीवनशैली और लोककला ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। स्थानीय औषधियों का लाइव प्रदर्शन और पारंपरिक व्यंजन—जोंधरी लाई के लड्डू, चापड़ा चटनी, मंडिया पेज, कुल्थी दाल, पान बोबो, आमट, तीखुर तथा पारंपरिक लांदा-सल्फी पेय पदार्थ—लोगों को बस्तर की विशिष्ट भोजन संस्कृति से रूबरू कराते रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर पंडुम जनजातीय संस्कृति को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। समापन अवसर पर अमित शाह ने बस्तर पंडुम की 12 विधाओं के विजेता दलों से भेंटकर उन्हें बधाई दी।

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