
पटना: बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव ने एक बार फिर सबका ध्यान खींच लिया है। जिस सीट को भारतीय जनता पार्टी का मजबूत शहरी गढ़ माना जाता रहा है, वहां जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनावी मुकाबले को पूरी तरह रोमांचक बना दिया है। मतगणना के दौरान किशोर लगातार बढ़त बनाए हुए हैं और जैसे-जैसे राउंड आगे बढ़ रहे हैं, भाजपा के लिए चुनौती बढ़ती दिखाई दे रही है।
बांकीपुर में मुकाबला भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा, जन सुराज के प्रशांत किशोर और राष्ट्रीय जनता दल की रेखा गुप्ता के बीच है। यह चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रशांत किशोर पहली बार सीधे चुनावी मैदान में उतरे हैं। ऐसे में बांकीपुर का परिणाम उनके राजनीतिक भविष्य और जन सुराज के विस्तार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीन दशक के भाजपा प्रभाव को चुनौती
बांकीपुर लंबे समय से भाजपा के प्रभाव वाला क्षेत्र रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस सीट पर करीब 63 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। यही वजह है कि यहां प्रशांत किशोर की बढ़त को सामान्य चुनावी उतार-चढ़ाव से अलग देखा जा रहा है। अगर किशोर अपनी बढ़त को जीत में बदलने में सफल होते हैं, तो यह भाजपा के लिए सिर्फ एक सीट का नुकसान नहीं होगा, बल्कि पटना के शहरी राजनीतिक समीकरण में बड़े बदलाव का संकेत भी माना जाएगा।

चुनावी रणनीतिकार से उम्मीदवार तक का सफर
प्रशांत किशोर लंबे समय तक चुनावी रणनीतिकार के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में चर्चित रहे हैं। अब उन्होंने खुद चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक जमीन बनाने की कोशिश की है। बांकीपुर को चुनावी शुरुआत के लिए चुनना भी अपने आप में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भाजपा का मजबूत आधार वाला शहरी क्षेत्र है।
चुनाव से पहले जन सुराज को संगठनात्मक झटका भी लगा था। पार्टी से जुड़े कुछ प्रमुख नेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया था। इसके बावजूद किशोर ने बांकीपुर में आक्रामक प्रचार अभियान चलाया और मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में सफलता हासिल की।
मतदान से पहले भी गरमाया था माहौल
बांकीपुर उपचुनाव सिर्फ राजनीतिक मुकाबले तक सीमित नहीं रहा। मतदान के दौरान प्रशांत किशोर ने पुलिस पर शक्तियों के कथित दुरुपयोग और मतदाताओं को प्रभावित करने के आरोप लगाए थे। उन्होंने इस संबंध में शिकायत भी दर्ज कराई। इस विवाद के बाद चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई थी।
बढ़ती बढ़त ने बढ़ाई भाजपा की चिंता
मतगणना शुरू होने के शुरुआती दौर में मुकाबला करीबी नजर आया, लेकिन बाद के राउंड में प्रशांत किशोर ने अपनी बढ़त लगातार बढ़ाई। 10वें राउंड तक वे 6 हजार से अधिक मतों से आगे बताए गए। इसके बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशांत किशोर भाजपा के इस पुराने गढ़ को अपने नाम कर पाएंगे?
अगर किशोर जीत दर्ज करते हैं तो यह जन सुराज के लिए बिहार की सक्रिय राजनीति में बड़ी एंट्री होगी। वहीं भाजपा के लिए बांकीपुर जैसे मजबूत शहरी क्षेत्र में हार संगठन और पारंपरिक वोट बैंक को लेकर नए सवाल खड़े कर सकती है।
सिर्फ उपचुनाव नहीं, 2029 की राजनीति की झलक?
बांकीपुर का परिणाम अपने आप में एक सीट का फैसला होगा, लेकिन इसके राजनीतिक संदेश का दायरा इससे बड़ा हो सकता है। अगर जन सुराज भाजपा के मजबूत शहरी आधार में सेंध लगाने में सफल होता है, तो बिहार में तीसरे राजनीतिक विकल्प की संभावनाओं पर बहस तेज हो सकती है।
फिलहाल अंतिम परिणाम का इंतजार है, लेकिन मतगणना के रुझानों ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि बांकीपुर का मुकाबला पारंपरिक भाजपा बनाम विपक्ष की लड़ाई से आगे निकल चुका है। प्रशांत किशोर ने इस सीट पर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराकर बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की संभावना को मजबूती दी है।
