मकर संक्रांति : दान देता है 100 गुना फल और आराधना से दूर होती हैं हड्डियों, आंखों की समस्याएं

मकर संक्रांति : हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का पर्व बहुत महत्व रखता है। यह प्रमुख उत्सवों में से एक है। इस दिन सूर्यदेव और भगवान विष्णु की आरती और चालीसा पढ़ने का खास महत्व है। इसी दिन उनकी पूजा करने से मिलते हैं कई तरह के लाभ। अधिकांश हिंदू त्योहार चंद्रमा की स्थिति पर आधारित होते हैं और उनकी तारीखें बदलती रहती हैं, लेकिन मकर संक्रांति सौर चक्र पर आधारित है। सूर्य हर साल 14 या 15 जनवरी को ही मकर राशि में प्रवेश करता है। पृथ्वी के अपनी धुरी पर झुकने के कारण, हर 70-100 साल में यह तारीख एक दिन आगे खिसक जाती है।
आइये मकर संक्राति पर सूर्य देव की उपासना और दान से जुड़े लाभ के बारे में जानते हैं-सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है। इस दिन सूर्य और शनि (मकर राशि के स्वामी) का मिलन होता है, जिससे कुंडली के संबंधित दोष शांत होते हैं। पूजा और ध्यान से चित्त शांत रहता है और एकाग्रता बढ़ती है। शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति पर किया गया दान 100 गुना फल देता है। काले तिल, गुड़, खिचड़ी और ऊनी कपड़ों का दान करने से व्यक्ति के अहंकार का नाश होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया दान पिछले जन्मों के दोषों और पापों को कम करता है।
सूर्य चालीसा के नियमित पाठ से आत्मविश्वास और तेज बढ़ता है। विद्यार्थियों के लिए यह बुद्धि प्रदाता माना गया है। समूह या व्यक्तिगत रूप से आरती करने से घर का वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। सूर्य की स्तुति करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है, विशेषकर हड्डियों और आँखों से जुड़ी समस्याओं में। खिचड़ी को सुपाच्य और पौष्टिक भोजन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार। चावल को चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है। दाल (उड़द) को शनि का। हल्दी को गुरु का और घी को सूर्य का। इन सबको मिलाकर खाने से सभी प्रमुख ग्रहों की कृपा प्राप्त होती है। इसे ‘उत्तर प्रदेश और बिहार’ में मुख्य पर्व के रूप में मनाया जाता है। जनवरी में कड़ाके की ठंड होती है। तिल और गुड़ की तासीर गर्म होती है, जो शरीर को ऊर्जा और गर्माहट प्रदान करती है।
शनि देव मकर राशि के स्वामी हैं और तिल शनि का प्रतीक है। सूर्य (पिता) का अपने पुत्र शनि के घर (मकर राशि) में तिल के साथ स्वागत करना ‘कड़वाहट को भुलाकर प्रेम से रहने’ का संदेश देता है।
उत्तरायण और मकर संक्रांति को अक्सर लोग इन्हें एक ही मानते हैं, लेकिन खगोलीय दृष्टि से थोड़ा अंतर है। मकर संक्रांति वह क्षण जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। उत्तरायण वह प्रक्रिया जब सूर्य उत्तर की ओर बढ़ना शुरू करता है, जिससे दिन लंबे होने लगते हैं। प्राचीन काल में ये दोनों एक ही दिन होते थे, लेकिन अब इनमें कुछ दिनों का अंतर आ गया है। पतंग उड़ाने का मुख्य उद्देश्य धूप के संपर्क में आना है। सर्दियों में शरीर में विटामिन-D की कमी हो जाती है और त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। पतंग उड़ाते समय लोग लंबे समय तक सुबह की धूप में रहते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होती है। संक्रांति के दिन तामसिक भोजन (मांसाहार, लहसुन, प्याज) से बचना चाहिए। किसी को खाली हाथ घर से नहीं भेजना चाहिए (दान का विशेष महत्व)। इस दिन अपशब्दों का प्रयोग न करने की सलाह दी जाती है।