छत्तीसगढ़

घुटने टेकता लाल सलाम ! कुख्यात नक्सली कमांडर देवा समेत 48 नक्सलियों ने डाले हथियार, कई बड़ी वारदातों को दे चुके हैं अंजाम

चार दशकों बाद खत्म होते सशस्त्र आंदोलन की दस्तक

हैदराबाद/बस्तर : नक्सली मोर्चे से जुड़ी अब तक की सबसे बड़ी ख़बर सामने आई है। बस्तर इलाके में लंबे समय से सक्रिय माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। करीब चार दशकों से सक्रिय और पुलिस के मोस्ट वांटेड सूची में शामिल माओवादी लीडर बारसे देवा ने अपने 48 साथियों सहित हैदराबाद पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सरेंडर करने वालों में सेंट्रल कमेटी के सदस्य कंकनाला राजा रेड्डी और बटालियन हेड बारसे देवा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। ये सभी नक्सली विभिन्न राज्यों की सरकारों द्वारा घोषित कुल 1 करोड़ 80 लाख रुपये के इनामी थे। समर्पण के दौरान इन नक्सलियों ने अपने साथ बड़ी संख्या में हथियार और गोला-बारूद भी जमा किए हैं।

संगठन के शीर्ष लीडर कमजोर पड़ी संरचना

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बारसे देवा का सरेंडर न सिर्फ एक बड़ी रणनीतिक सफलता है बल्कि बस्तर ज़ोन में नक्सली संगठन की शक्ति को गहराई से कमजोर करेगा। बीते कई सालों में पुलिस और केंद्रीय बलों के लगातार अभियानों के चलते नक्सली प्रभाव पहले ही घट चुका था, वहीं अब इस सरेंडर के बाद संगठन का शीर्ष नेतृत्व लगभग समाप्त हो गया है।

सूत्र बताते हैं कि बारसे देवा बस्तर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों में नक्सली गतिविधियों का संचालन करता था और संगठन में उसकी भूमिका बेहद अहम थी। वह भर्ती, फंडिंग और कई बड़े हमलों की रणनीति का मास्टरमाइंड माना जाता रहा है।

पुलिस और सरकार की नीति का असर

नक्सली हिंसा को खत्म करने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकारों की मिलीजुली रणनीति अब असर दिखाती दिख रही है। लगातार चल रही लोन वर्राटू (घर लौटो) योजना और समाज की मुख्यधारा में लौटने को लेकर चलाए जा रहे अभियानों का यह बड़ा परिणाम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी कई माओवादी आत्मसमर्पण की तैयारी में हैं।

चार दशकों बाद खत्म होते सशस्त्र आंदोलन की दस्तक

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटना नक्सल आंदोलन के इतिहास में एक बड़ा मोड़ है। चार दशकों से अधिक समय तक जंगलों में पनपता यह संघर्ष अब अपने अंतिम दौर में पहुंचता नजर आ रहा है। स्थानीय पुलिस का कहना है कि अब संगठन के पास न तो प्रशिक्षित नेता बचे हैं, न ही पुराना नेटवर्क।

सरेंडर करने वालों को सरकार से राहत

सरेंडर करने वाले सभी नक्सलियों को राज्य सरकार की नीतियों के तहत पुनर्वास का लाभ दिया जाएगा। उन्हें आर्थिक सहायता, रोजगार प्रशिक्षण और सुरक्षित पुनर्वास स्थल प्रदान किए जाएंगे ताकि वे समाज की मुख्यधारा में लौट सकें।

इस सरेंडर के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने दावा किया है कि आने वाले महीनों में बस्तर और आसपास के इलाकों में नक्सली प्रभाव लगभग खत्म हो जाएगा — जो दशकों से चल रही इस जंग के अंत की सबसे बड़ी निशानी हो सकती है।

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