आंगनबाड़ी केंद्रों में ‘न्योता भोज’ अभियान बना जनभागीदारी का मजबूत माध्यम, 1.83 लाख से ज्यादा बच्चों को मिला लाभ

रायपुर: छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से संचालित ‘न्योता भोज’ कार्यक्रम पोषण, शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने वाला प्रभावी अभियान बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुसार शुरू की गई इस पहल में अब समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है।
राज्य स्तर पर जनवरी से फरवरी 2026 के बीच कुल 9,763 न्योता भोज कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनसे 1,83,927 बच्चों को लाभ मिला। यह आंकड़े इस अभियान की व्यापक सफलता और प्रभाव को दर्शाते हैं।
जिलेवार आंकड़ों में बिलासपुर सबसे आगे रहा, जहां 884 आयोजनों में 18,703 बच्चे लाभान्वित हुए। वहीं कोरबा में 720 आयोजनों से 13,944 बच्चों, रायगढ़ में 690 आयोजनों से 9,835 बच्चों और कांकेर में 636 आयोजनों से 7,915 बच्चों को पौष्टिक भोजन मिला।
इसके अलावा धमतरी में 606 आयोजनों से 11,228 बच्चों, महासमुंद में 415 आयोजनों से 7,302 बच्चों और जांजगीर-चांपा में 439 आयोजनों से 10,518 बच्चों को लाभ पहुंचाया गया।

इस कार्यक्रम के तहत नागरिक, जनप्रतिनिधि, दानदाता और अभिभावक अपने विशेष अवसर—जैसे जन्मदिन, वर्षगांठ या अन्य पारिवारिक खुशी—आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के साथ भोजन साझा कर मना रहे हैं। इससे बच्चों को अतिरिक्त पौष्टिक आहार मिल रहा है और समाज में उनके प्रति जिम्मेदारी व संवेदनशीलता भी बढ़ रही है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले अधिकांश बच्चे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से होते हैं। ऐसे में ‘न्योता भोज’ जैसे प्रयास उनके शारीरिक और मानसिक विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
यह पहल कुपोषण को कम करने के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्रों के प्रति बच्चों और अभिभावकों का आकर्षण भी बढ़ा रही है। शासन ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे अपने सामाजिक और पारिवारिक अवसरों को आंगनबाड़ी के बच्चों के साथ साझा कर इस अभियान को और अधिक सशक्त बनाएं।

