बस्तर में नक्सल हिंसा के पीड़ितों के जीवन में लौटेगी खुशहाली, 3,600 से अधिक दिव्यांगजनों को मिली सहायता
अमित शाह बोले—नक्सलवाद के दशकों पुराने घाव भरना और पीड़ितों को सम्मानजनक जीवन देना सरकार की जिम्मेदारी

सेवा संकल्प अभियान के तहत जगदलपुर में बांटे गए कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण, बस्तर के 1,570 से अधिक लाभार्थी शामिल
रायपुर/नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के बस्तर में दशकों तक चली नक्सल हिंसा ने आदिवासी समुदाय को शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरी चोट पहुंचाई है। अब हिंसा से प्रभावित लोगों को आत्मनिर्भर बनाने, उनके जीवन में खुशहाली लौटाने और उन्हें सम्मान के साथ जीने का अवसर देने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद भी उससे प्रभावित लोगों के दर्द को दूर करना और उनके जीवन को दोबारा संवारने में मदद करना सरकार की जिम्मेदारी है।
गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित सहायता उपकरण वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि पिछले पांच दशकों में नक्सलवाद ने बस्तर के गरीब आदिवासियों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। हिंसा के कारण दिव्यांग हुए लोगों को कृत्रिम अंग और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराना उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को केवल सहायता देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और सम्मानजनक जीवन जीने में सहयोग देना भी जरूरी है।
जगदलपुर में अभियान से 3,600 से अधिक लोगों को लाभ
अमित शाह ने बताया कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत 5 से 7 अक्टूबर के बीच जगदलपुर में सहायता उपकरण वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस पहल से 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए, जिनमें अकेले बस्तर क्षेत्र के 1,570 से अधिक लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े क्षेत्र में नक्सल हिंसा के कारण लोगों को झेलनी पड़ी पीड़ा और उसके व्यापक प्रभाव को सामने लाते हैं।
अभियान के अंतर्गत नक्सल हिंसा के कारण दिव्यांग हुए आदिवासियों को कृत्रिम हाथ-पैर और जरूरत के अनुसार अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य प्रभावित लोगों को दैनिक गतिविधियां स्वयं करने, आजीविका से जुड़ने और दूसरों पर निर्भरता कम करने में मदद करना है।
तीन साल बाद खुद पानी पी सका लाभार्थी
गृह मंत्री ने अभियान के एक लाभार्थी का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसे व्यक्ति की बात सुनी, जिसे इस कार्यक्रम के तहत सहायता मिली थी। उस व्यक्ति ने बताया कि तीन साल बाद वह अपने हाथ से गिलास उठाकर पानी पी सका।
अमित शाह ने कहा कि किसी व्यक्ति को दोबारा अपने दैनिक कार्य स्वयं करने में सक्षम बनाना केवल उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। यह उसके आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को लौटाने का भी प्रयास है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने हिंसा के कारण अपने हाथ-पैर गंवाए हैं अथवा जिनकी सुनने या देखने की क्षमता प्रभावित हुई है, उनकी जरूरतों की पहचान कर उन्हें उपयुक्त सहायता उपलब्ध कराना आवश्यक है।
नक्सलवाद के बाद पुनर्वास और विकास पर जोर
अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने का अर्थ यह नहीं है कि पिछले पांच दशकों में लोगों ने जो दुख झेले, वे अपने आप मिट जाएंगे। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, दिव्यांगजनों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने के लिए ठोस प्रयास करने होंगे।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का संकल्प नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों को बेहतर जीवन उपलब्ध कराना और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। सेवा संकल्प अभियान इसी दिशा में एक प्रयास है, जिसके माध्यम से जरूरतमंद लोगों को सहायता उपकरण देकर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि 31 मार्च 2026 से पहले देश से नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया गया था और अब नक्सलवाद के खात्मे के साथ प्रभावित लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में काम करना जरूरी है। बस्तर के लिए वास्तविक बदलाव तभी सार्थक होगा, जब हिंसा से प्रभावित लोग आत्मनिर्भर बनें, उनके परिवारों को आगे बढ़ने के अवसर मिलें और वे सम्मान के साथ सामान्य जीवन जी सकें।
