तेंदूपत्ता संग्राहकों को राहत: इस योजना से 12 लाख से अधिक परिवारों को मिला आर्थिक लाभ

रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए ‘चरण पादुका योजना’ (जूते-चप्पल वितरण), शिक्षा प्रोत्साहन योजना (छात्रवृत्ति), और बढ़ी हुई पारिश्रमिक दर (₹5500 प्रति मानक बोरा) जैसी कई योजनाएं चला रही है, जिससे 12 लाख से अधिक परिवारों को आर्थिक लाभ (करोड़ों रुपये का भुगतान) हुआ है, उनकी आय बढ़ी है, और उन्हें शिक्षा व सम्मान के अवसर मिल रहे हैं; इससे आदिवासी और गरीब परिवारों का जीवन स्तर सुधर रहा है।
मुख्य योजनाएं और उनके फायदे:
बढ़ी हुई पारिश्रमिक दर:
योजना: तेंदूपत्ता संग्रहण दर ₹4000 से बढ़ाकर ₹5500 प्रति मानक बोरा की गई है।
फायदा: संग्राहकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे आय में वृद्धि हुई है और आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है।
लाभार्थी: 10.85 लाख से अधिक संग्राहक लाभान्वित हुए हैं, जिन्हें करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया है।
‘चरण पादुका योजना’:
योजना: तेंदूपत्ता संग्राहकों (पुरुषों और महिलाओं) को जूते-चप्पल (चरण पादुका) दिए जाते हैं।
फायदा: यह योजना संग्राहकों के पैरों की सुरक्षा करती है और उनके स्वाभिमान व सम्मान का प्रतीक है, खासकर कठिन परिस्थितियों में काम करने वालों के लिए।
लाभार्थी: 12.40 लाख से अधिक संग्राहकों को इसका लाभ मिल रहा है।
शिक्षा प्रोत्साहन योजना (छात्रवृत्ति):
योजना: तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के बच्चों को कक्षा 10वीं और 12वीं में 75% या अधिक अंक लाने पर छात्रवृत्ति (₹10,000 से ₹25,000 तक) दी जाती है।
फायदा: बच्चों की शिक्षा जारी रखने और उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे परिवार की सामाजिक स्थिति सुधर रही है।
लाभार्थी: पिछले पांच वर्षों में 38,000 से अधिक छात्र-छात्राओं को लगभग ₹41.80 करोड़ की छात्रवृत्ति मिली है।
सामाजिक सुरक्षा और बीमा:
योजना: ‘राजमोहनी देवी तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना’ और बीमा योजनाओं का लाभ मिलता है।
फायदा: प्राकृतिक आपदा या अन्य मुश्किलों में परिवारों को आर्थिक सहायता मिलती है, जैसे बीजापुर में फसल खराब होने पर भी पूरा मेहनताना दिया गया।
