
राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम 2009 के अंतर्गत निजी स्कूलों में प्रवेश को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। विभाग द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार अब आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश कक्षा पहली से ही दिया जाएगा। इससे पहले तक कई स्थानों पर नर्सरी या केजी स्तर पर प्रवेश की प्रक्रिया अपनाई जा रही थी, जिसे लेकर लगातार असमंजस और शिकायतें सामने आ रही थीं।
इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के संचालक को औपचारिक आदेश जारी किया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(ग) के प्रावधानों के अनुसार राज्य में निजी विद्यालयों में केवल कक्षा पहली में ही आरटीई के अंतर्गत प्रवेश दिया जाएगा। इस प्रस्ताव को अब प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि निजी स्कूलों द्वारा आरटीई के तहत कक्षा पहली में प्रवेश दिए जाने के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव पर सहमति दे दी गई है। स्कूल शिक्षा विभाग के उप सचिव नीलम टोप्पो द्वारा जारी इस आदेश के बाद अब पूरे राज्य में आरटीई प्रवेश प्रक्रिया एक समान होगी, जिससे अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन दोनों को स्पष्ट दिशा मिलेगी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस बदलाव का उद्देश्य आरटीई कानून की मूल भावना को प्रभावी ढंग से लागू करना है। आरटीई अधिनियम के तहत 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का प्रावधान है, और कक्षा पहली इसी आयु वर्ग की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है। ऐसे में कक्षा पहली से ही प्रवेश सुनिश्चित करना कानून के अनुरूप माना गया है।
नए आदेश के तहत निजी स्कूलों को आरटीई के अंतर्गत प्रवेश देते समय निर्धारित शर्तों और दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। पात्र बच्चों का चयन पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या भेदभाव की गुंजाइश न रहे। साथ ही, राज्य सरकार द्वारा निर्धारित फीस प्रतिपूर्ति व्यवस्था भी यथावत लागू रहेगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से आरटीई के क्रियान्वयन में स्पष्टता आएगी और बच्चों को प्रारंभिक स्तर से ही समान अवसर मिल सकेंगे। वहीं अभिभावकों को भी अब यह स्पष्ट हो जाएगा कि आरटीई के तहत निजी स्कूलों में उनके बच्चों का प्रवेश कक्षा पहली से ही संभव होगा।
