छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में खनन परियोजना के तहत काटे जा रहे हसदेव अरण्य के हजारों पेड़, स्थानीय महिलाओं ने वृक्षों को गले लगाकर किया विरोध

Hasdeo Forest:
सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में स्थानीय महिलाओं द्वारा पेड़ों को बचाने के लिए ‘चिपको आंदोलन’ की शुरुआत की गई है। यह आंदोलन हसदेव अरण्य(Hasdeo Forest) के पेड़ों को बचाने के लिए किया गया है जिसे खनन परियोजना के लिए काटा जाना था।
26 अप्रैल 2022 की सुबह जनार्दनपुर की महिलाएं पेड़ों को कटने से बचाने के लिए चिपको आंदोलन को पुनः दोहराती हुई नजर आई। दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा परसा ईस्ट केटे बेसन कोयला खदानों के दूसरे के खनन की मजदूरी 6 अप्रैल को दे दी गई थी जिसके तहत यहां पेड़ों की कटाई करनी थी लेकिन जब इसकी खबर वहां के स्थानीय महिलाओं को हुई तो वे उसका विरोध करते हुए नजर आए और पेड़ों को गले लगा लिया। यह योजना राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम के स्वामित्व में और अडानी समूह द्वारा संचालित है।
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छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला का कहना है कि महिलाओं और ग्रामीणों के पेड़ काटने के विरोध को देखकर पहले तो जिला प्रशासन के अधिकारी वापस लौट गए लेकिन फिर पुनः सुबह 3:00 बजे आकर लगभग 300 पेड़ों को काट दिया।
उन्होंने आगे बताया कि ग्रामीण हमेशा से ही इसका विरोध करते हुए आए हैं वे नहीं चाहते कि इन पेड़ों को काटा जाए जिसके लिए वे 2 मार्च से अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं।
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इस परियोजना के तहत कुल 200,000 पेड़ों को काटा जाना है हालांकि “वन सलाहकार रिपोर्ट” के अनुसार 95000 पेड़ काटे जाएंगे लेकिन आंकलन किया जाए तो 840 हेक्टेयर भूमि में लगभग दो लाख जितने पेड़ को कटना होगा। इन पेड़ों के कटने के साथ ही कई जिलों जैसे सरगुजा सूरजपुर हरिहरपुर और सेली गांव के 700 लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ेगा।
यहां के जंगल(Hasdeo Forest) इन ग्रामीणों की जीवन रेखा है और वे नहीं चाहते कि इन्हें उनसे छीन लिया जाए। आदिवासियों को कहना है कि यह कार्य उनकी सहमति के बिना हो रहा है और इसलिए 80 फ़ीसदी ग्रामीण इस परियोजना के विरोध में है और उन्होंने वन भूमि डायवर्सन के मुआवजे को भी लेने से मना कर दिया है। इसके बाद भी इस मामले को ग्रामीणों के पक्ष में रखकर नहीं देखा जा रहा है और पेड़ों को काटने का काम जारी है।

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