सुकमा ब्रेकिंग: शांति की ओर निर्णायक कदम, गोगुंडा क्षेत्र में सक्रिय 29 माओवादी मुख्यधारा में लौटे, “पूना मार्गेम” में हुए शामिल

सुकमा: जिले के गोगुंडा क्षेत्र में नक्सल उन्मूलन की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। दरभा डिवीजन के अंतर्गत केरलापाल एरिया कमेटी में सक्रिय 29 सशस्त्र माओवादियों ने सामूहिक आत्मसमर्पण करते हुए हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। सभी आत्मसमर्पित कैडर राज्य की “पूना मार्गेम” पुनर्वास योजना में शामिल होकर शांति और विकास की मुख्यधारा में लौटे हैं।
सपोर्ट सिस्टम भी हुआ ध्वस्त
इन 29 माओवादियों के आत्मसमर्पण के साथ ही न केवल सशस्त्र कैडर बल्कि उनका पूरा सपोर्ट नेटवर्क भी कमजोर पड़ा है। यह आत्मसमर्पण संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि ये सभी माओवादी लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय थे और जिला सुकमा की कई बड़ी नक्सली वारदातों में शामिल रहे हैं।
सुरक्षा कैंप से बदला गोगुंडा का परिदृश्य
गोगुंडा क्षेत्र में सुरक्षा कैंप की स्थापना के बाद हालात तेजी से बदले हैं। मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, लगातार ऑपरेशन और प्रशासन की सक्रिय मौजूदगी के कारण क्षेत्र में भरोसे का माहौल बना, जिसका सीधा असर इस सामूहिक आत्मसमर्पण के रूप में सामने आया है। इसके बाद केरलापाल एरिया कमेटी अब नक्सल मुक्त होने के अंतिम चरण में पहुंच गई है।
प्रशासनिक संवाद से आया सकारात्मक बदलाव
1 जनवरी को जिले के कलेक्टर, एसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी गोगुंडा गांव पहुंचे थे, जहां उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। शासन-प्रशासन की इस पहल, विकास योजनाओं और सुरक्षा के भरोसे ने ग्रामीणों और प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव की नींव रखी।
नक्सल संगठन समाप्ति की ओर
सुदूर इलाकों में नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना और तेज नक्सल विरोधी अभियानों से लगातार मिल रही सफलताओं के चलते सुकमा जिले में माओवादी संगठन अब समाप्ति की ओर अग्रसर है। सुरक्षा बलों की सख्ती और पुनर्वास की नीति ने संगठन की पकड़ को कमजोर किया है।
शेष कैडरों के लिए स्पष्ट संदेश
प्रशासन ने शेष माओवादी कैडरों से अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर जल्द से जल्द शांति और विकास के मार्ग पर लौटें तथा “पूना मार्गेम” पुनर्वास अभियान से जुड़कर सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत करें।
सुरक्षा बलों की अहम भूमिका
इस पूरी सफलता में जिला पुलिस बल, डीआरजी, सीआरपीएफ की 74वीं वाहिनी और कोबरा की 201वीं वाहिनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिनके समन्वित प्रयासों से सुकमा में शांति की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ा है।