
रायपुर/नई दिल्ली: अमेरिका के हालिया हवाई हमलों में ईरान के रणनीतिक चाबहार बंदरगाह को भी नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार हमले में चाबहार पोर्ट का समुद्री यातायात नियंत्रण (Maritime Traffic Control) टॉवर और एक वेयरहाउस क्षतिग्रस्त हुआ है। इस घटनाक्रम ने न केवल पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है, बल्कि भारत की लंबे समय से जुड़ी इस रणनीतिक परियोजना के भविष्य को लेकर भी नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है चाबहार पोर्ट?
चाबहार बंदरगाह भारत की सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं में से एक माना जाता है। यह ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है और भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान तथा मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच उपलब्ध कराता है।
यह बंदरगाह इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का भी अहम हिस्सा है, जिसके जरिए भारत, ईरान, रूस और यूरोप के बीच व्यापारिक संपर्क को मजबूत करने की योजना बनाई गई थी।
भारत ने किया था बड़ा निवेश
भारत ने वर्ष 2016 में चाबहार परियोजना में लगभग 55 करोड़ डॉलर निवेश की घोषणा की थी। इसके बाद मई 2024 में भारत और ईरान के बीच शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन के लिए 10 वर्षीय समझौता भी हुआ था।
हालांकि, इस वर्ष के केंद्रीय बजट में पहली बार चाबहार परियोजना के लिए कोई अलग बजटीय प्रावधान नहीं किया गया। पिछले वर्ष इसके लिए 400 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था।
अमेरिकी प्रतिबंध और भू-राजनीतिक दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि चाबहार में निवेश की रफ्तार धीमी होने के पीछे अमेरिका के प्रतिबंध, ईरान की मौजूदा सुरक्षा स्थिति और बदलते वैश्विक समीकरण प्रमुख कारण हैं।
अमेरिका पहले भी ईरान से जुड़े आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर भारत को सीमित छूट देता रहा है, लेकिन भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में भारत किसी नए बड़े वित्तीय निवेश को लेकर सतर्क रुख अपनाता दिखाई दे रहा है।
क्या भारत पीछे हट रहा है?
विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत चाबहार परियोजना से पीछे हट रहा है। भारत पहले ही इस परियोजना में अरबों रुपये का निवेश कर चुका है और 2024 में हुए 10 वर्षीय संचालन समझौते के तहत उसकी भागीदारी अभी भी जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अमेरिका और ईरान दोनों के साथ कूटनीतिक संतुलन बनाए रखते हुए इस परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा, क्योंकि चाबहार भारत की क्षेत्रीय संपर्क रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
हमले का संभावित असर
* चाबहार बंदरगाह के संचालन पर अस्थायी असर पड़ सकता है।
* भारत-अफगानिस्तान और मध्य एशिया के व्यापारिक मार्ग प्रभावित हो सकते हैं।
* INSTC परियोजना की गति पर भी असर पड़ने की आशंका है।
* भारत को अमेरिका और ईरान के बीच संतुलित कूटनीतिक रणनीति अपनानी पड़ सकती है।
फिलहाल स्थिति
ईरान ने चाबहार पोर्ट के कंट्रोल टॉवर को नुकसान पहुंचने की पुष्टि की है। हालांकि, बंदरगाह पूरी तरह बंद किए जाने की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। भारत सरकार की ओर से भी इस ताजा हमले पर अभी कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।