रूस से दोस्ती पर अमेरिका बेचैन, भारत समेत 10 देशों पर 100 फीसदी टैरिफ की तैयारी
अमेरिकी संसद में विधेयक पेश, रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों को प्रभावित करने का मकसद

- प्रस्ताव में भारत, चीन समेत 10 देशों के नाम; 100 फीसदी तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार देने की तैयारी
नई दिल्ली: रूस से भारत और चीन समेत अन्य देशों की बढ़ती ऊर्जा खरीद को लेकर अमेरिका में दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी संसद में रूस से कारोबार करने वाले देशों पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने से संबंधित विधेयक और संशोधन चर्चा में हैं। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बढ़ाना और उसके साथ व्यापार करने वाले देशों को आर्थिक रूप से प्रभावित करना बताया गया है।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पेश किए गए संशोधन में भारत, चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाखस्तान और किर्गिजस्तान को संभावित टैरिफ के दायरे में लाने का प्रस्ताव है। हालांकि, इन देशों पर अभी 100 फीसदी टैरिफ लागू नहीं हुआ है। प्रस्तावित कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार देने से संबंधित है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहल रूस के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों को और कड़ा करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है। रूस के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कारोबार को निशाना बनाकर उसकी तेल एवं गैस से होने वाली आय पर दबाव बनाने की रणनीति पर चर्चा हो रही है।
भारत के लिए यह प्रस्ताव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। भारत लगातार यह रुख रखता आया है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर तय होती है।
अमेरिकी सीनेट में रूस पर नए प्रतिबंधों से संबंधित विधेयक पहले ही आगे बढ़ चुका है। अब प्रतिनिधि सभा में इसके विभिन्न प्रावधानों और संशोधनों पर विचार किया जा रहा है। अंतिम कानून में कौन-कौन से प्रावधान शामिल होंगे और उनका इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा, यह आगे की संसदीय प्रक्रिया और अमेरिकी प्रशासन के निर्णय पर निर्भर करेगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया नहीं गया है। यह प्रस्तावित अमेरिकी कानून के तहत संभावित कार्रवाई का हिस्सा है। यदि ऐसा प्रावधान अंतिम रूप से कानून बनता है और अमेरिकी राष्ट्रपति इसका इस्तेमाल करते हैं, तो इसका भारत-अमेरिका व्यापार और रूस से भारत की ऊर्जा खरीद पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

