छत्तीसगढ़बिग ब्रेकिंगभारत

झीरम घाटी नक्सली हमला: 13 साल बाद आया बड़ा फैसला, 10 दोषियों को फांसी की सजा

25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हुआ था घातक हमला, वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की गई थी जान

  • एनआईए की विशेष अदालत ने 5 सितंबर को 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था, आज सजा का ऐलान; एक आरोपी की ट्रायल के दौरान मौत

जगदलपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे चर्चित और घातक माओवादी हमलों में शामिल झीरम घाटी हमले के मामले में 13 साल से अधिक समय बाद अदालत ने सजा का ऐलान कर दिया है। जगदलपुर स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency-NIA) की विशेष अदालत ने 2013 के झीरम घाटी हमले में दोषी ठहराए गए सभी 10 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने इन आरोपियों को आपराधिक साजिश और हत्या समेत विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया था।

यह फैसला उस हमले के 13 साल से अधिक समय बाद आया है, जिसने छत्तीसगढ़ के राजनीतिक परिदृश्य को गहराई से प्रभावित किया था। 25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के हथियारबंद कैडरों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार हमले में 27 लोगों की मौत और 38 लोग घायल हुए थे। बाद की रिपोर्टों में कुल मृतकों की संख्या 29 बताई गई है, जिसमें हमले में घायल हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल की बाद में हुई मृत्यु भी शामिल है।

कैसे हुआ था झीरम घाटी हमला?
25 मई 2013 की दोपहर कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला बस्तर क्षेत्र से गुजर रहा था। काफिले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता, सुरक्षाकर्मी और अन्य लोग शामिल थे। जब काफिला दरभा थाना क्षेत्र की झीरम घाटी से होकर गुजर रहा था, तभी माओवादियों ने सुनियोजित तरीके से उसे निशाना बनाया।

एनआईए के रिकॉर्ड के मुताबिक, शाम करीब 4:15 बजे हमला शुरू हुआ। माओवादियों ने पहले सड़क पर विस्फोट कर काफिले की आवाजाही रोक दी। इसके बाद चारों ओर से गोलीबारी और ग्रेनेड हमले किए गए। भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 150 से अधिक हथियारबंद माओवादियों ने लगभग 20 वाहनों वाले काफिले को घेर लिया और करीब दो घंटे तक हमला जारी रहा।

हमले के दौरान माओवादियों ने हथियार और अन्य सुरक्षा उपकरण भी लूटे। एनआईए के रिकॉर्ड में एक 9 एमएम पिस्तौल, दो एके-47 राइफल, बड़ी संख्या में कारतूस, हैंड ग्रेनेड और संचार उपकरणों के लूटे जाने का उल्लेख है।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व हुआ था निशाना
झीरम घाटी हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई बड़े नेता मारे गए। तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष और बस्तर के प्रमुख राजनीतिक नेता महेंद्र कर्मा तथा वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक उदय मुदलियार हमले में मारे गए।

पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल भी हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। इस वजह से झीरम घाटी हमला केवल एक माओवादी हिंसक घटना नहीं रहा, बल्कि इसे छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास की एक निर्णायक त्रासदी के रूप में देखा गया।

महेंद्र कर्मा को मुख्य निशाना बनाने का आरोप
राष्ट्रीय जांच एजेंसी की चार्जशीट के मुताबिक, माओवादी नेतृत्व ने वर्ष 2013 की शुरुआत में बैठकें कर अपने कथित ‘क्लास एनिमी’ को निशाना बनाने की रणनीति तैयार की थी। जांच एजेंसी ने महेंद्र कर्मा को हमले के प्रमुख लक्ष्यों में से एक बताया था। कर्मा सलवा जुडूम आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेताओं में थे और माओवादियों के निशाने पर लंबे समय से रहे थे।

जांच NIA को सौंपी गई
हमले के दो दिन बाद, 27 मई 2013 को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के आदेश के तहत एनआईए ने मामले की जांच अपने हाथ में ली। एनआईए ने दरभा थाने में दर्ज प्राथमिकी को अपने यहां पुनः दर्ज कर जांच शुरू की। एजेंसी ने 25 सितंबर 2014 को नौ गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद 28 सितंबर 2015 को 30 अन्य आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की गई।

एनआईए की जांच में बड़ी संख्या में आरोपियों को नामजद किया गया था। इनमें से कई आरोपी लंबे समय तक फरार रहे। कुछ बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि कुछ मुठभेड़ों में मारे गए। भारतीय एक्सप्रेस के अनुसार, चार्जशीट में नामजद 28 आरोपी अभी भी इस मामले में वांछित बताए गए हैं।

10 आरोपियों को दोषी ठहराया गया
मामले की लंबी सुनवाई के बाद 5 सितंबर 2026 को जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत ने ट्रायल का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। अदालत ने 101 गवाहों के बयान दर्ज किए। मूल रूप से 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चल रही थी, लेकिन उनमें से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।

दोषी ठहराए गए आरोपियों के नाम हैं:

* प्रमिला मोडियाम
* चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना
* सुमित्रा उर्फ पुनेम मोडियाम
* मुक्का मंडावी
* कोसा कवासी उर्फ कोसराम
* आयता मरकाम
* मड़कामी देवा
* जोगा मड़कामी
* बंजामी सन्ना उर्फ चमरू
* महादेव नाग

भारतीय एक्सप्रेस के अनुसार, अदालत ने आपराधिक साजिश के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B और हत्या के लिए धारा 302 के तहत मौत की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अन्य संबंधित धाराओं और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत भी दोषसिद्धि हुई।

13 साल चली कानूनी प्रक्रिया
झीरम घाटी मामले की सुनवाई एक दशक से अधिक समय तक चली। भारतीय एक्सप्रेस के मुताबिक मुकदमे में 294 से अधिक सुनवाई हुईं। सितंबर 2014 में पहली चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले में लगातार कानूनी कार्यवाही चलती रही और अंततः सितंबर 2026 में दोषसिद्धि और सजा का चरण आया।

‘बड़ी साजिश’ की जांच को लेकर भी उठे सवाल
झीरम घाटी मामले की जांच के साथ-साथ हमले के पीछे कथित बड़ी राजनीतिक साजिश की जांच का मुद्दा भी वर्षों तक चर्चा में रहा। 2018 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बनने के बाद जनवरी 2019 में राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (Special Investigation Team-SIT) गठित किया। इसके बाद 25 मई 2020 को कांग्रेस नेता उदय मुदलियार के पुत्र जितेंद्र मुदलियार की शिकायत पर दरभा थाने में हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित एक नई प्राथमिकी दर्ज की गई।

इस दूसरी जांच को लेकर एनआईए और राज्य पुलिस के बीच कानूनी विवाद भी हुआ। एनआईए ने नई प्राथमिकी की जांच अपने हाथ में लेने की मांग की, लेकिन विशेष अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मामला हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 2022 में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य पुलिस को दूसरी प्राथमिकी की जांच आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया था।

अब आगे क्या?
आज सुनाई गई मौत की सजा के बाद मामला यहीं समाप्त नहीं होता। दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का कानूनी विकल्प रहेगा। बचाव पक्ष ने पहले ही दोषसिद्धि के खिलाफ हाई कोर्ट जाने की बात कही थी और कहा था कि लिखित आदेश मिलने के बाद अपील के आधार तय किए जाएंगे।

इस प्रकार, 25 मई 2013 की झीरम घाटी की घटना से शुरू हुई लंबी न्यायिक प्रक्रिया ने 16 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया है। अदालत ने मामले में ट्रायल का सामना कर रहे सभी 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है, जबकि जांच में नामजद अन्य फरार आरोपियों से संबंधित कार्रवाई अलग स्तर पर जारी रहने की स्थिति में है।

Related Articles

Back to top button