
नई दिल्ली/चेन्नई: भारतीय जनता पार्टी के पूर्व तमिलनाडु अध्यक्ष और चर्चित नेता अन्नामलाई ने आखिरकार भाजपा से अपना नाता तोड़ते हुए नई राजनीतिक पार्टी बनाने की औपचारिक घोषणा कर दी है। लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए उन्होंने कहा कि अब तमिलनाडु में “नई राजनीति” की शुरुआत होगी और उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरेगी। अन्नामलाई के इस फैसले ने तमिलनाडु की राजनीति में नया समीकरण खड़ा कर दिया है, वहीं भाजपा के लिए भी यह बड़ा झटका माना जा रहा है।
शुक्रवार को इस्तीफा मंजूर होने के बाद अन्नामलाई ने भावुक अंदाज में कहा कि पिछले कुछ समय से वह एक बड़े वैचारिक द्वंद्व से गुजर रहे थे। उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह तय करना मुश्किल हो गया था कि मैं पहले बीजेपी का सदस्य हूं या एक तमिलियन। मैंने कभी भी तमिलनाडु की पहचान, संस्कृति, भाषा और राज्य के अधिकारों से समझौता नहीं किया। लेकिन मुझे लगा कि अब एक अलग रास्ते पर चलने का समय आ गया है।”
अन्नामलाई ने बताया कि उन्होंने 4 दिसंबर 2025 को ही पार्टी नेतृत्व को इस्तीफा देने की इच्छा जता दी थी। हालांकि, उस समय केंद्रीय नेतृत्व ने उनसे चुनाव तक संगठन में बने रहने का आग्रह किया था। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में उन्होंने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई बड़े नेताओं से मुलाकात की थी। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मनाने का प्रयास भी किया, लेकिन अंततः सहमति नहीं बन सकी और उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया।
अपने संबोधन में अन्नामलाई ने साफ किया कि उनका नया राजनीतिक मंच केवल सत्ता की राजनीति के लिए नहीं होगा, बल्कि तमिलनाडु की क्षेत्रीय आकांक्षाओं और युवाओं की उम्मीदों को केंद्र में रखकर काम करेगा। उन्होंने कहा कि “आज से एक नया आंदोलन शुरू हो रहा है। यह केवल एक पार्टी नहीं बल्कि नई सोच और नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत है। तमिलनाडु को ऐसी राजनीति चाहिए जो दिल्ली और क्षेत्रीय दलों के बीच संतुलन बनाते हुए राज्य के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी छोड़ने का निर्णय किसी व्यक्तिगत नाराजगी का परिणाम नहीं है। अन्नामलाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर प्रशंसा करते हुए कहा कि वह उनका सम्मान करते हैं और पिछले डेढ़ वर्ष से नेतृत्व के साथ मतभेदों पर शांतिपूर्ण चर्चा करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि “मैंने सम्मानजनक तरीके से भाजपा छोड़ी है। लक्ष्य बड़ा है और इसके लिए ज्यादा लोगों को साथ लेकर चलना होगा।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई का यह कदम तमिलनाडु की राजनीति में तीसरे विकल्प की संभावनाओं को मजबूत कर सकता है। राज्य की राजनीति लंबे समय से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के इर्द-गिर्द घूमती रही है। भाजपा पिछले कुछ वर्षों में राज्य में अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही थी और इस अभियान का चेहरा अन्नामलाई ही थे।
पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने भाजपा में शामिल होने के बाद बेहद आक्रामक और जमीनी शैली की राजनीति अपनाई थी। उन्होंने भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तमिल पहचान जैसे मुद्दों पर लगातार अभियान चलाए। उनकी पदयात्रा और सोशल मीडिया पर सक्रियता ने उन्हें युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाया। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा तमिलनाडु में एक भी सीट नहीं जीत सकी, लेकिन पार्टी का वोट शेयर करीब 3 प्रतिशत से बढ़कर 11 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इसे अन्नामलाई की व्यक्तिगत राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक क्षमता का परिणाम माना गया।
हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। AIADMK के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने के बावजूद पार्टी केवल सीमित वोट शेयर हासिल कर सकी। चुनाव के बाद भाजपा के भीतर रणनीति और गठबंधन को लेकर असहमति की चर्चाएं तेज हो गई थीं। AIADMK नेतृत्व के साथ अन्नामलाई के संबंध भी लगातार तनावपूर्ण बताए जाते रहे। इसी पृष्ठभूमि में 2025 में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को जिम्मेदारी दी गई थी।
अब अन्नामलाई के अलग होने से भाजपा की दक्षिण भारत रणनीति पर भी असर पड़ सकता है। पार्टी ने पिछले कुछ वर्षों में तमिलनाडु में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए अन्नामलाई को एक आक्रामक और आधुनिक चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया था। ऐसे में उनका जाना केवल संगठनात्मक नुकसान नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दूसरी ओर, तमिलनाडु की राजनीति में क्षेत्रीय अस्मिता हमेशा बड़ा मुद्दा रही है। हिंदी थोपने के आरोप, कावेरी जल विवाद, राज्य अधिकार और भाषा-संस्कृति से जुड़े मुद्दे यहां की राजनीति को लगातार प्रभावित करते रहे हैं। अन्नामलाई ने अपने भाषण में इन्हीं भावनात्मक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इससे संकेत मिल रहे हैं कि उनकी नई पार्टी “तमिल पहचान” और “राज्य अधिकार” को केंद्र में रखकर अपनी राजनीतिक रणनीति तैयार कर सकती है।
फिलहाल अन्नामलाई ने अपनी नई पार्टी के नाम और संगठनात्मक ढांचे की घोषणा नहीं की है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में राज्यभर में व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू किया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि क्या अन्नामलाई तमिलनाडु में भाजपा के वोट बैंक को अपने साथ ले जा पाएंगे या फिर उनका नया प्रयोग क्षेत्रीय राजनीति में सीमित असर तक ही सिमट जाएगा।
तमिलनाडु की राजनीति में यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब राज्य में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में अन्नामलाई का नया राजनीतिक दांव आगामी चुनावी मुकाबले को और अधिक दिलचस्प बना सकता है।