गुप्तचर विशेषछत्तीसगढ़

सरकार का हांथ- पैर घी में और सिर कढ़ाई में- गुप्तचर

 

रायपुर . छत्तीसगढ़ पूरे प्रदेश में शराब दुकानों में जिस तरह से शराब का मूल्य बढ़ा कर बेचा जा रहा उससे यह साफ़ हो गया है कि सरकार जनता को कंगाल करना चाहती है . इस काम के लिये सरकार का साथ प्लेसमेंट कंपनी खासतौर पर दे रही है ।प्लेसमेंट कंपनी ने अजीबो-गरीब हेराफेरी का खेल रचा है। इसमें आबकारी विभाग के उच्चाधिकारी भी शामिल हैं। इस हेराफेरी के फंडे आम आदमी के लिए समझ से परे हैं। प्लेसमेंट कंपनी अलर्ट कमांडो शराब बिक्री के पूरे पैसे हर महीने जमा नहीं कर रही है।

किसी जिले में 50 लाख तो कहीं 20 और कहीं 16 लाख रुपये का अंतर हिसाब-किताब में मिलता है, जिसे नोटिस आदि मिलने पर प्लेटमेंट कंपनी बाद में जमा करती है। इस तरह हर महीने रोके गए 24 करोड़ रुपये से कंपनी लाखों का ब्याज कमा लेती है। ऐसे में प्लेसमेंट कंपनी का करीब 75 फीसद खर्च सरकारी धन से ही पूरा हो जा रहा है। और यह सब कराने विभागीय मंत्री से आलाधिकारी शामिल है।

इसकी जानकारी होने के बावजूद रायपुर ही नहीं, अन्य जिलों के आबकारी अधिकारी चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। अलर्ट कमांडो कंपनी की डिस्टलरी भी है और कंपनी प्रबंधन की पकड़ सत्ता के गलियारे तक है। ऐसे में अब कंपनी के लिए फंड की व्यवस्था करने में आबकारी विभाग भी जुटा है।

इधर, भाजपा नेताओं का आरोप है कि हर महीने करोड़ों की गड़बड़ी करने वाली कंपनी के काले कारनामों के चलते हर माह करोड़ों के राजस्व की चपत भी लग रही है।

सूत्रों के मुताबिक कंपनी प्रबंधन अपने कर्मचारियों के माध्यम से यह गड़बड़ी करवा रही है। पकड़े जाने पर आरोपित कर्मचारियों को हटाने के बजाय उन्हें दूसरे जिलों की शराब दुकानों में तैनात कर देती है। दूसरी ओर जांच के नाम पर आबकारी अधिकारी नोटशीट और नियमों का हवाला देते हुए होशियारी से महज कागजी कार्रवाई कर मामले को रफादफा कर देते हैं।

बीते महीने पंडरी स्थित शराब दुकान में 24 लाख से अधिक की हेराफेरी सामने आई थी। कर्मचारी पैसा लेकर फरार हो गया था। मामला थाने तक जाने से पहले ही कंपनी प्रबंधन ने राजनीतिक दबाव डलवाकर एफआइआर नहीं होने दी। हैरतवाली बात यह रही कि आबकारी विभाग के अधिकारी ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था।

शराब दुकान बंद होने पर आबकारी विभाग के अधिकारी आडिट करते हैं तो करीब दो से तीन लाख रुपये की गड़बड़ी हिसाब देने में होती है। यह उसी दिन पता नहीं चलता। जब आबकारी विभाग अपना हिसाब-किताब अपडेट करता है तब हेराफेरी की जानकारी होती है। इसके बाद पैसा जमा करने के लिए नोटिस जारी किया जाता है।

बिना आपराधिक रिकार्ड खंगाले शराब दुकानों में कर्मचारियों की तैनाती

सरकारी शराब दुकानों में शराब बिकवाने का जिम्मा संभालने वाली प्लेसमेंट कंपनी अलर्ट कमांडो के कर्मचारियों का आपराधिक रिकार्ड खंगालने के लिए पुलिस वेरिफिकेशन तक नहीं कराया गया है। अब इनकी हेराफेरी और शराब बिक्री के पैसे को लेकर फरार होने के मामले सामने आने लगे हैं।

टेंडर और आबकारी अधिनियम के मुताबिक शराब बेचने वाली कंपनी नियमों का पालन नहीं कर रही है। इसके बावजूद कंपनी पर कार्रवाई करने के बजाय आबकरी विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। रायपुर ही नहीं, बिलासपुर सहित प्रदेश के अन्य जिलों में यही हाल है।

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