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सड़क पर दिखते थे आम फेरीवाले, बाइक में बना रखा था सीक्रेट चैंबर… छत्तीसगढ़ में 2 करोड़ के गांजा नेटवर्क का खुलासा, 13 गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ में गांजा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत रायपुर रेंज पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। ‘ऑपरेशन निश्चय’ के तहत महासमुंद, धमतरी और गरियाबंद जिलों में संयुक्त कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 13 अंतरराज्यीय गांजा तस्करों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 378 किलो से अधिक गांजा, 11 मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन और नगदी समेत करीब 1 करोड़ 98 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की गई है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपी खुद को कपड़ा बेचने वाला फेरीवाला बताकर बाइक के जरिए गांजा की तस्करी कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार तस्करों ने बाइक में विशेष रूप से लोहे का गुप्त कम्पार्टमेंट तैयार कराया था, जिसमें गांजा छिपाकर एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाया जा रहा था। बाहर से देखने पर ये बाइक सामान्य फेरीवालों की गाड़ी जैसी नजर आती थीं।

पुलिस को कैसे मिली सफलता?
रायपुर रेंज पुलिस को लंबे समय से ओडिशा से छत्तीसगढ़ होते हुए मध्यप्रदेश तक गांजा सप्लाई किए जाने की सूचना मिल रही थी। इसके बाद आईजी रायपुर रेंज के निर्देश पर तकनीकी निगरानी, मुखबिर तंत्र और सीमावर्ती इलाकों में विशेष चेकिंग अभियान शुरू किया गया। इसी दौरान महासमुंद और धमतरी जिलों में संदिग्ध बाइक सवारों की गतिविधियां सामने आईं।

पुलिस ने जब वाहनों की तलाशी ली तो बाइक के पीछे बनाए गए लोहे के जाल और छिपे हुए कम्पार्टमेंट से भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। जांच में पता चला कि आरोपी ओडिशा के बालिगुड़ा और रायगढ़ा क्षेत्रों से गांजा लाकर मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों में सप्लाई करने की तैयारी में थे।

महासमुंद में सबसे बड़ी कार्रवाई
महासमुंद जिले में बसना और कोमाखान थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 247 किलो गांजा बरामद किया। यहां से कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपी 7 मोटरसाइकिलों में गांजा लेकर जा रहे थे।

पूछताछ में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं। पुलिस को आशंका है कि यह एक संगठित नेटवर्क है, जो लंबे समय से अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय है।

धमतरी में नाबालिग भी शामिल
धमतरी जिले में वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस ने 131 किलो गांजा के साथ दो आरोपियों और एक विधि से संघर्षरत बालक को पकड़ा। यहां भी आरोपियों ने कपड़ा बेचने वाले फेरीवाले का रूप धारण कर रखा था। तीन बाइक में गांजा छिपाकर ले जाया जा रहा था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार तस्कर लगातार ऐसे तरीके अपना रहे हैं, जिससे वे आम लोगों की नजर में सामान्य व्यवसायी दिखाई दें और आसानी से चेकिंग से बच निकलें।

जब्त किया गया सामान
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कुल 378 किलो से ज्यादा गांजा जब्त किया है। इसके अलावा 11 मोटरसाइकिल, 9 मोबाइल फोन, नगदी राशि और गांजा छिपाने में इस्तेमाल किए गए विशेष लोहे के जाले भी जब्त किए गए हैं। जब्त सामान और मादक पदार्थों की कुल कीमत लगभग 1 करोड़ 98 लाख रुपए बताई जा रही है।

पहले भी बदलते रहे हैं तस्करी के तरीके
रायपुर रेंज पुलिस के मुताबिक, गांजा तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपनाकर पुलिस को चकमा देने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले भी पुलिस एम्बुलेंस, केला ट्रांसपोर्ट, मूवर्स एंड पैकर्स, बस, ट्रेन और ऑटो की आड़ में हो रही गांजा तस्करी का खुलासा कर चुकी है।

अब फेरीवाले के भेष में बाइक के जरिए तस्करी का यह नया तरीका सामने आने के बाद पुलिस ने सीमावर्ती इलाकों और अंतरराज्यीय मार्गों पर निगरानी और बढ़ा दी है।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान मध्यप्रदेश निवासी मेताप टाटिया, रमेश चौहान, राजू कुमावत, दीपक राजपूत, प्रकाश बंजारा, मोहम्मद रिहान, मनोज सिंह, राजेश ओबनी और दौलत सिंह को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा महाराष्ट्र निवासी जितेंद्र और विकास को भी पकड़ा गया है। अन्य आरोपियों की पहचान और नेटवर्क की जांच जारी है।

नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
रायपुर रेंज पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की सप्लाई चेन, फंडिंग और अन्य राज्यों से जुड़े संपर्कों की गहराई से जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि गिरफ्तार आरोपी केवल कुरियर या सप्लाई एजेंट हो सकते हैं, जबकि इसके पीछे एक बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय है।

पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साथ ही ओडिशा और मध्यप्रदेश पुलिस के साथ समन्वय बनाकर नेटवर्क के मुख्य सरगनाओं तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

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