भारत

1 जुलाई से लागू होगा “विकसित भारत-जी राम जी कानून”, ग्रामीण रोजगार को मिलेगी नई दिशा

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार और विकास व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में कदम उठाते हुए “विकसित भारत-गारंटीड रोजगार एवं ग्रामीण मिशन (वीबी-जी राम जी)” कानून को 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। यह नया कानून वर्तमान में लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगा।

ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नए कानून के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर 100 दिनों से 125 दिन कर दिया गया है। सरकार का दावा है कि यह कदम ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने, पलायन रोकने और गांवों में स्थायी विकास कार्यों को गति देने में मददगार साबित होगा।

अधिसूचना में कहा गया है कि 30 जून तक मनरेगा के अंतर्गत चल रहे सभी कार्य पूर्ववत जारी रहेंगे और किसी भी परियोजना को बीच में नहीं रोका जाएगा। इसके बाद नई व्यवस्था के तहत सभी योजनाओं और कार्यों को चरणबद्ध तरीके से “वीबी-जी राम जी” कानून के दायरे में लाया जाएगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान मनरेगा जॉब कार्ड तब तक वैध बने रहेंगे, जब तक नए कार्ड जारी नहीं कर दिए जाते। इस दौरान किसी भी श्रमिक को तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा।

रोजगार नहीं मिलने पर मिलेगा भत्ता
नए कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी श्रमिक को रोजगार की मांग करने के निर्धारित समय के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो उसे बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया को भी अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाया गया है। अब भुगतान सीधे लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से श्रमिकों के बैंक खातों में भेजा जाएगा।

सरकार ने मजदूरी भुगतान की समयसीमा तय करते हुए कहा है कि भुगतान अधिकतम 15 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। इससे मजदूरों को समय पर भुगतान मिलने और बिचौलिया व्यवस्था समाप्त होने की उम्मीद जताई जा रही है।

95 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान
केंद्र सरकार ने योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराने के लिए 95,692 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया है। वहीं राज्यों को भी अपने बजट से अतिरिक्त राशि खर्च करनी होगी। अनुमान है कि केंद्र और राज्यों का कुल संयुक्त व्यय 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।

प्रशासनिक खर्च की सीमा भी बढ़ाई गई है। नए कानून में इसे 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है, ताकि ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों को योजनाओं के बेहतर संचालन और निगरानी के लिए पर्याप्त संसाधन मिल सकें।

ग्रामीण विकास को मिलेगा बढ़ावा
केंद्र सरकार का कहना है कि नया कानून केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्राम स्तर पर स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण, जल संरक्षण, ग्रामीण सड़क, सिंचाई और बुनियादी ढांचे के विकास को भी प्राथमिकता देगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है। वहीं विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने नए कानून के कई प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा और पारदर्शिता की मांग भी उठाई है।

1 जुलाई से लागू होने जा रही यह नई व्यवस्था आने वाले समय में देश की ग्रामीण रोजगार नीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।

Related Articles

Back to top button