बिजली बिल लेट होने पर अब नहीं लगेगा पूरे महीने का सरचार्ज, नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत
एक दिन की देरी पर अब सिर्फ एक दिन का ही लगेगा शुल्क, 30 दिन की देरी पर भी पुरानी व्यवस्था से कम होगा अधिभार

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। बिजली बिल के लेट पेमेंट सरचार्ज (विलंब अधिभार) को लेकर सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में चल रही भ्रामक खबरों के बीच छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि नई व्यवस्था उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने के बजाय उन्हें आर्थिक राहत देने के उद्देश्य से लागू की गई है।
पावर कंपनी के अनुसार, राज्य विद्युत नियामक आयोग (सीएसईआरसी) द्वारा लागू किए गए संशोधित नियमों के तहत अब विलंब अधिभार की गणना वास्तविक देरी के दिनों के आधार पर होगी। कंपनी ने स्पष्ट किया कि इसे “रोजाना ब्याज” या “दोहरे झटके” के रूप में प्रचारित करना पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक है।
पहले एक दिन की देरी पर भी लगता था पूरे महीने का चार्ज
कंपनी के मुताबिक, पहले यदि कोई उपभोक्ता बिजली बिल की नियत तिथि के बाद सिर्फ एक या दो दिन की देरी से भुगतान करता था, तब भी उससे पूरे महीने का 1.5 प्रतिशत लेट पेमेंट सरचार्ज वसूला जाता था। इससे कम अवधि की देरी करने वाले उपभोक्ताओं पर भी अनावश्यक आर्थिक भार पड़ता था।
अब जितनी देरी, उतना ही अधिभार
नई व्यवस्था के तहत अब लेट पेमेंट सरचार्ज 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन की दर से लगाया जाएगा। यानी उपभोक्ता जितने दिन भुगतान में देरी करेगा, उसे केवल उतने ही दिनों का अधिभार देना होगा। इससे लेट फीस की गणना अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी हो गई है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी उपभोक्ता से केवल एक दिन की देरी होती है, तो अब उसे पूरे महीने का 1.5 प्रतिशत सरचार्ज नहीं देना पड़ेगा, बल्कि सिर्फ 0.04 प्रतिशत का ही अधिभार लगेगा।
30 दिन की देरी पर भी मिलेगा फायदा
पावर कंपनी के अनुसार यदि कोई उपभोक्ता पूरे 30 दिन तक बिल का भुगतान नहीं करता है, तब भी कुल विलंब अधिभार 1.2 प्रतिशत (0.04 प्रतिशत × 30 दिन) ही बनेगा, जो पुरानी व्यवस्था में लगने वाले 1.5 प्रतिशत सरचार्ज से कम है।
भ्रामक खबरों से बचने की अपील
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी ने कहा है कि नई व्यवस्था में लेट पेमेंट सरचार्ज की दरें बढ़ाई नहीं गई हैं, बल्कि उपभोक्ताओं के हित में उन्हें अधिक तर्कसंगत बनाया गया है। कंपनी ने आम नागरिकों और समाचार माध्यमों से अपील की है कि वे तथ्यों पर आधारित जानकारी ही साझा करें ताकि उपभोक्ताओं के बीच किसी प्रकार का भ्रम न फैले।