CBI Action: महादेव ऐप सट्टेबाजी मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई, 11 आरोपपत्र दाखिल; भ्रष्टाचार और धनशोधन नेटवर्क पर शिकंजा
छह आरोपपत्र भ्रष्टाचार मामले में, पांच आरोपपत्र अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़े 66 आरोपियों के विरुद्ध; मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ अतिरिक्त साक्ष्य भी अदालत में प्रस्तुत

नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation-सीबीआई) ने महादेव ऐप से जुड़े बहुचर्चित मामलों की जांच में महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए कुल 11 आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किए हैं। इनमें भ्रष्टाचार से संबंधित मामले में छह आरोपपत्र तथा अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़े मामले में पांच आरोपपत्र शामिल हैं। जांच एजेंसी ने बताया कि मामले की जांच जारी है और आगे भी अतिरिक्त आरोपपत्र दाखिल किए जाएंगे।
सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code-आईपीसी) के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र के आरोपों में आशीम दास, रोहित गुलाटी, विकास छापरिया, अनिल धमानी, विशाल आहूजा और धीरज आहूजा के विरुद्ध छह आरोपपत्र दाखिल किए हैं। इसके अलावा, पहले आरोपपत्रित किए जा चुके मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल तथा अन्य आरोपियों के विरुद्ध अतिरिक्त साक्ष्य भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं।
महादेव ऐप से जुड़े दूसरे मामले में सीबीआई ने भारतीय दंड संहिता तथा छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत कुल 66 आरोपियों के विरुद्ध पांच आरोपपत्र दाखिल किए हैं। इनमें महादेव ऐप के कथित संचालक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के अलावा बेटिंग सिंडिकेट के विभिन्न पैनलों से जुड़े सदस्य भी शामिल हैं, जिनके माध्यम से अपराध से अर्जित धन का लेन-देन और हस्तांतरण किया जाता था।
जांच में सामने आया है कि महादेव ऐप देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट में से एक है, जिसका संचालन भारत से बाहर बैठकर किया जा रहा था। जांच एजेंसी के अनुसार, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से इस नेटवर्क का देशभर में विस्तार किया और लाखों उपयोगकर्ताओं तक इसकी पहुंच बनाई। सिंडिकेट विभिन्न राज्यों में अवैध बेटिंग पैनलों का संचालन कर उपयोगकर्ताओं का पंजीकरण करता था तथा सट्टेबाजी और ऑनलाइन खेलों के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध कमाई करता था।
सीबीआई के अनुसार, अपराध से अर्जित धन को पहले बड़ी संख्या में फर्जी एवं म्यूल बैंक खातों के जरिए इधर-उधर स्थानांतरित किया गया और बाद में विदेश भेजा गया। जांच में यह भी सामने आया है कि इस अवैध धन का एक हिस्सा लोक सेवकों को कथित संरक्षण राशि के रूप में भी दिया गया।
जांच एजेंसी ने बताया कि महादेव ऐप के प्रवर्तक तथा उनके कई सहयोगी कुछ वर्ष पहले भारत छोड़कर पश्चिम एशियाई देशों में चले गए थे और वहीं से इस नेटवर्क का संचालन जारी रखे हुए हैं। विदेश भाग चुके चार प्रमुख आरोपियों के विरुद्ध इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस पहले ही जारी किए जा चुके हैं। उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कराने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।
सीबीआई ने कहा कि पूरे सट्टेबाजी नेटवर्क, उससे जुड़े आर्थिक लेन-देन, राजनीतिक एवं नौकरशाही संरक्षण तथा अन्य सभी संबंधित आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है। जांच पूरी होने के साथ ही आवश्यकता अनुसार और भी आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए जाएंगे।
