अमेरिका: बच्चों को फोन से दूर करने के लिए 18 लाख रुपये तक खर्च कर रहे माता-पिता
स्क्रीन की लत छुड़ाने के लिए सात सप्ताह के ‘नो-फोन’ कैंप में भेज रहे बच्चे

न्यूयॉर्क: स्मार्टफोन के दौर में बढ़ती स्क्रीन की लत से परेशान अमेरिकी माता-पिता अब बच्चों को फोन से दूर रखने के लिए बड़ी रकम खर्च कर रहे हैं। कुछ माता-पिता अपने बच्चों को सात सप्ताह के विशेष ‘नो-फोन’ कैंप में भेज रहे हैं, जिसकी फीस 14,600 से 18,975 डॉलर यानी करीब 14 से 18 लाख रुपये तक है।
रिपोर्ट के अनुसार, कई माता-पिता बच्चों को कम उम्र में स्मार्टफोन देने के बाद अब उन्हें स्क्रीन से दूर करने के लिए भारी-भरकम राशि खर्च कर रहे हैं। इसका एक उदाहरण 13 वर्षीय एमा का है। उसके माता-पिता ने उसे चार साल की उम्र में आईफोन दिया था। इसके बाद टिकटॉक पर शॉर्ट वीडियो देखने, फेसटाइम पर दोस्तों से बातचीत और यूट्यूब पर समय बिताने की आदत बढ़ती गई। कैंप पहुंचने के बाद शुरुआती दिनों में वह बार-बार अपनी खाली जेब में फोन तलाशती रही।
कनेक्टिकट के ग्रीनवुड ट्रेल्स कैंप के निदेशक एंडी हिक्स बताते हैं कि कैंप में आने वाले बच्चों से उनका फोन जमा करा लिया जाता है। इससे बच्चों में शुरुआत में बेचैनी और असहजता दिखाई देती है, लेकिन कुछ समय बाद वे फोन के बिना सामान्य गतिविधियों में रुचि लेने लगते हैं।
डिजिटल डिटॉक्स से दिख रहे बड़े बदलाव
कैंप में बच्चों को फोन से दूर रखने के साथ उनकी दिनचर्या में कई तरह की गतिविधियां शामिल की जाती हैं। यहां बच्चों को दोस्तों से आमने-सामने बातचीत करने, समूह में समय बिताने और अन्य गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
कैंप से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, घर में बच्चों के असहज होने पर माता-पिता अक्सर फोन को ‘सुरक्षा कवच’ की तरह इस्तेमाल करते हैं। कैंप में फोन नहीं होने के कारण बच्चों को बातचीत और सामाजिक गतिविधियों में शामिल होने का अवसर मिलता है।
टायलर हिल कैंप की ओनर एंडी सीगल के अनुसार, स्क्रीन की लत बच्चों की नींद पर भी असर डालती है। घर पर बच्चे टीवी या फोन देखने के बाद देर रात तक करवटें बदलते रहते हैं, जबकि कैंप में कुछ समय बिताने के बाद उनकी नींद में सुधार दिखाई देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन से दूर रखने से उनकी सामाजिक गतिविधियों, बातचीत और नींद की आदतों में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। हालांकि, बच्चों को स्मार्टफोन देने की उम्र और स्क्रीन टाइम को लेकर माता-पिता के सामने नई चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।