छत्तीसगढ़

CG Liquor Scam: शराब घोटाले में 6 महीने बाद चैतन्य बघेल को मिली जमानत

रायपुर : छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को बड़ी राहत मिली है. जहां चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है. कोर्ट ने एसीबी/EOW और ED दोनों के मामलों में सुनवाई के बाद जमानत याचिका स्वीकार कर ली.

इसके पहले 22 दिसंबर को चैतन्य बघेल के खिलाफ EOW ने रायपुर के विशेष कोर्ट में 3800 पन्नो का 8वां पूरक चालान पेश किया है. इस चालान में चैतन्य को 200 से 250 करोड़ रूपये मिलने का खुलासा हुआ. EOW को सौम्या, अरुणपति, अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर की व्हाट्सऐप चैट से इसकी जानकारी मिली. EOW द्वारा पेश चार्जशीट में सनसनीखेज खुलासे ​जांच एजेंसी ने कोर्ट को सौंपे दस्तावेजों में चैतन्य बघेल की संलिप्तता को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं. जांच में खुलासा हुआ है कि शराब घोटाले के माध्यम से चैतन्य बघेल को 200 से 250 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे.

ED ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन पर 18 जुलाई को भिलाई निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था. शराब घोटाले की जांच ईडी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपए की अवैध कमाई (पीओसी) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंचाई गई.

जाँच एजेंसियों के अनुसार, 2019 से 2022–23 के बीच शराब की बिक्री, सप्लाई और ठेकों में हेराफेरी कर हज़ारों करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार घोटाले की रकम लगभग ₹2,800 करोड़ से ₹3,200 करोड़ के बीच है। यह पैसा राज्य सरकार के खजाने में जाने की बजाय एक संगठित सिंडिकेट के जरिए निजी लोगों तक पहुँचाया गया। जाँच एजेंसियों के मुताबिक शराब ठेकों और सप्लाई में फिक्स कमीशन सिस्टम नकली बिल और समानांतर (अवैध) बिक्री सरकारी नियमों को दरकिनार कर अवैध वसूली, अफसरों, नेताओं और कारोबारियों की मिलीभगत से किया गया।जाँच एजेंसियों (ED / EOW) के अनुसार, यह घोटाला केवल अफसरों या कारोबारियों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें राजनीतिक संरक्षण और हस्तक्षेप की भी अहम भूमिका रही।शराब नीति और आबकारी व्यवस्था में ऐसे बदलाव किए गए, जिनसे अवैध कमाई का रास्ता खुला कुछ खास लोगों/सिंडिकेट को फायदा पहुँचाने के लिए नीतिगत फैसले लिए गए। अफसरों पर राजनीतिक दबाव डालकर सिस्टम को नियंत्रित किया गया । जाँच एजेंसियाँ मानती हैं कि बिना ऊपरी राजनीतिक संरक्षण के इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं था।

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