छत्तीसगढ़

ईडब्ल्यूएस-एलआईजी आवास के लिए छत्तीसगढ़ की पहल को राष्ट्रीय सम्मान, 25,413 घरों के लिए बिना सरकारी खर्च मिली जमीन

विश्व पर्यावास दिवस पर विज्ञान भवन में मिला पुरस्कार, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ को राष्ट्रीय पहचान

रायपुर: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के परिवारों को किफायती एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत ईडब्ल्यूएस-एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण और एएचपी (Affordable Housing in Partnership) मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन को भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में सम्मानित किया है।

विश्व पर्यावास दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने छत्तीसगढ़ को यह पुरस्कार प्रदान किया। राज्य की ओर से नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और राज्य शहरी विकास अभिकरण (एसयूडीए) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी-सह-राज्य मिशन संचालक, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) सुमित अग्रवाल ने सम्मान ग्रहण किया।

‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ में मिल रही गति
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, एसयूडीए और नगरीय निकायों की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में छत्तीसगढ़ की कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना प्रदेश के लिए गौरव की बात है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रहा है। पक्का घर केवल चार दीवारें और छत नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार है। राज्य सरकार का प्रयास है कि कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे।

निजी कॉलोनियों में भूमि आरक्षण से 25,413 आवासों के लिए जमीन
शहरी क्षेत्रों में गरीब और निम्न आय वर्ग के लिए आवास निर्माण में भूमि की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए निजी कॉलोनियों में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण के प्रावधान को प्रभावी ढंग से लागू किया है।

इस व्यवस्था के तहत राज्य में 25,413 आवासों के निर्माण के लिए बिना सरकारी खर्च के भूमि उपलब्ध हुई है। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के तहत 17,790 और योजना 2.0 के तहत 7,623 आवास शामिल हैं।

इस पहल से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के आवास केवल शहरों के बाहरी इलाकों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि नियोजित कॉलोनियों और विकसित शहरी क्षेत्रों का हिस्सा बन सकेंगे। इससे लाभार्थियों को सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाओं तक बेहतर पहुंच मिलने की संभावना भी मजबूत हुई है।

जमीन से लेकर घर तक प्रभावी व्यवस्था
उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन और विकास मंत्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने शहरी गरीबों के आवास के लिए केवल योजना बनाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि भूमि की उपलब्धता से लेकर किफायती घर के निर्माण तक प्रभावी व्यवस्था विकसित की है।

उन्होंने कहा कि ईडब्ल्यूएस-एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण और एएचपी मॉडल को राष्ट्रीय सम्मान मिलना राज्य में किए जा रहे ठोस प्रयासों का परिणाम है। विभाग द्वारा आवासीय परियोजनाओं की स्वीकृति, भूमि की उपलब्धता, निर्माण की गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता की नियमित निगरानी की जा रही है।

विकसित शहरी क्षेत्रों से जुड़ेंगे जरूरतमंद परिवार
राज्य सरकार की इस पहल से 25 हजार से अधिक शहरी गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों के पक्के घर का सपना साकार होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है। निजी कॉलोनियों में भूमि आरक्षण ने एक ओर आवास निर्माण के लिए जमीन की चुनौती को कम किया है, वहीं दूसरी ओर कमजोर वर्गों को विकसित शहरी क्षेत्रों और बेहतर नागरिक सुविधाओं से जोड़ने का रास्ता भी तैयार किया है।

विश्व पर्यावास दिवस पर मिला यह राष्ट्रीय सम्मान ‘सबके लिए आवास’ के लक्ष्य को धरातल पर उतारने की दिशा में छत्तीसगढ़ की प्रतिबद्धता, नवाचार और परिणामोन्मुख कार्यप्रणाली की राष्ट्रीय पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

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