छत्तीसगढ़

महासमुंद जिले में एक ही दिन में गुमशुदगी के 36 मामले दर्ज, पुलिस ने गंभीरता से शुरू की जांच

लगातार सामने आ रहे मामलों से बढ़ी चिंता, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गुमशुदगी के मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच पर जोर

महासमुंद: जिले में लंबे समय से लंबित गुमशुदगी के मामलों को लेकर पुलिस ने अब सख्त रुख अपनाया है। पुलिस ने एक ही दिन में जिले के 11 थाना क्षेत्रों में गुमशुदगी से जुड़े 36 मामले दर्ज कर जांच शुरू की है। इनमें मई, जून, जुलाई और अगस्त महीने में लापता हुए युवक-युवतियों, महिलाओं और अन्य लोगों के मामले शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, इन मामलों को अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 140(3) के तहत दर्ज कर विवेचना की जा रही है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गुमशुदगी के मामलों में अब केवल सामान्य गुमशुदगी दर्ज करने के बजाय अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

चार माह से लंबित मामलों में अब एफआईआर
पुलिस के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लंबे समय से लंबित गुमशुदगी के मामलों की दोबारा समीक्षा की गई। इसके बाद जिन मामलों में आवश्यक आधार मिले, उनमें एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि हर मामले में अपहरण या अन्य अपराध की पुष्टि हो गई है। जांच के दौरान तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

महासमुंद और खल्लारी में सबसे अधिक मामले
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, महासमुंद शहर में 6 और खल्लारी थाना क्षेत्र में 5 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा कोमाखान में 4, पिथौरा में 4, तुमगांव में 4 और अन्य थाना क्षेत्रों में भी गुमशुदगी के मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस अब इन मामलों में लापता व्यक्तियों की तलाश, उनके संभावित ठिकानों, संपर्कों और संबंधित परिस्थितियों की जांच कर रही है।

सभी थाना क्षेत्रों में चल रही पता-तलाश
महासमुंद के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुशील नायक ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में लंबे समय से गुम इंसानों की खोजबीन के लिए एफआईआर दर्ज की गई है। सभी संबंधित थाना क्षेत्रों में पता-तलाश की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि गुमशुदगी के मामलों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस स्तर पर आवश्यक कार्रवाई जारी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर संबंधित मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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