
पटना: बिहार की नई सम्राट सरकार का पहला बड़ा शक्ति प्रदर्शन सोमवार को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में देखने को मिला, जहां मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ। मुख्यमंत्री बनने के 22 दिन बाद हुए इस मेगा विस्तार में कुल 32 नए मंत्रियों ने शपथ ली।
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत NDA के कई बड़े नेता मौजूद रहे। प्रधानमंत्री मोदी पटना एयरपोर्ट से रोड शो करते हुए गांधी मैदान पहुंचे, जहां रास्तेभर उनका भव्य स्वागत किया गया और जगह-जगह फूलों की बारिश की गई।
समारोह की शुरुआत को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही। राज्य सरकार के प्रोटोकॉल के अनुसार पहले राष्ट्रगीत *वंदे मातरम* बजाया जाना था, लेकिन कार्यक्रम में सीधे राष्ट्रगान से शुरुआत हुई। विपक्ष ने इसे लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
NDA का जातीय समीकरण साधने की कोशिश
मंत्रिमंडल विस्तार में NDA ने स्पष्ट रूप से जातीय और सामाजिक संतुलन पर फोकस किया है। नई कैबिनेट में EBC, OBC, दलित, सवर्ण और मुस्लिम समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
सम्राट कैबिनेट का कुल सामाजिक समीकरण इस प्रकार माना जा रहा है—
* EBC : 10
* OBC : 6
* दलित : 7
* सवर्ण : 9
* मुस्लिम : 1
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के चुनावी समीकरण को ध्यान में रखते हुए NDA ने बिहार के सामाजिक ढांचे को साधने की रणनीति अपनाई है।
भाजपा और जेडीयू में नए चेहरों को मौका
भाजपा कोटे से 15 मंत्री बनाए गए हैं, जिनमें कई नए चेहरों को पहली बार कैबिनेट में स्थान मिला। इनमें मिथिलेश तिवारी, रामचंद्र पासवान, अरुण शंकर प्रसाद, नंद किशोर राम और इंजीनियर शैलेंद्र प्रमुख हैं।
वहीं जेडीयू की ओर से 13 मंत्रियों ने शपथ ली, जिनमें निशांत कुमार, बुलो मंडल और श्वेता गुप्ता जैसे नए चेहरे शामिल हैं। इसके अलावा LJP(R) से दो, HAM और RLM से एक-एक मंत्री को जगह दी गई है।
CM Samrat Chaudhary
महिला प्रतिनिधित्व भी बढ़ा
नई कैबिनेट में कुल पांच महिला मंत्री शामिल की गई हैं। इनमें सबसे अधिक तीन महिला मंत्री जेडीयू कोटे से हैं। इसे महिला वोट बैंक को साधने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
गांधी मैदान बना राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच
शपथ ग्रहण समारोह के लिए गांधी मैदान में तीन बड़े मंच बनाए गए थे। एक मंच पर संवैधानिक कार्यक्रम, दूसरे पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और तीसरे पर विशेष अतिथियों की व्यवस्था की गई थी।
प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत के लिए पारंपरिक लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। भाजपा कार्यालय के बाहर *हरे राम-हरे कृष्ण* भजन-कीर्तन का आयोजन भी चर्चा का विषय बना रहा। पटना शहर भगवा पोस्टरों और NDA समर्थक बैनरों से पटा नजर आया। कई पोस्टरों पर “भगवामय, अंग, बंग और कलिंग” जैसे नारे लिखे गए थे।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्षी दलों ने मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। राजद और कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि कैबिनेट विस्तार में अनुभव से ज्यादा जातीय गणित को प्राथमिकता दी गई है। वहीं कुछ विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रगीत की जगह सीधे राष्ट्रगान बजाने को लेकर भी सरकार को घेरा।
बिहार की राजनीति में बड़ा संदेश
राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह विस्तार सिर्फ मंत्रिमंडल गठन नहीं, बल्कि आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले NDA का बड़ा राजनीतिक संदेश है। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय महत्व दे दिया। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में भाजपा-जेडीयू गठबंधन ने यह संकेत देने की कोशिश की कि बिहार में NDA पूरी तरह एकजुट है और सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है।

