
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में 2026 का विधानसभा चुनाव सिर्फ सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत बन गया है। अभिनेता-राजनेता C. Joseph Vijay की पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) ने राज्य की दशकों पुरानी द्रविड़ राजनीति के मजबूत किले में सेंध लगाकर बड़ा संकेत दे दिया है – यह बदलाव स्थायी होगा या एक और क्षणिक प्रयोग, इसका जवाब इतिहास में छिपा है।
तमिलनाडु का चुनावी इतिहास बताता है कि नई पार्टियों की एंट्री कभी क्रांति का रास्ता बनती है, तो कभी महत्वाकांक्षाओं का अंत। इस संदर्भ में अतीत की झलक आज की राजनीति को समझने के लिए बेहद अहम हो जाती है।
जब DMK ने बदला था पूरा खेल
1949 में C. N. Annadurai द्वारा स्थापित Dravida Munnetra Kazhagam ने 1957 के चुनाव में पहली बार कदम रखा। सीमित संसाधनों के बावजूद पार्टी ने 15 सीटें जीतकर 14.8% वोट हासिल किए। यह सिर्फ शुरुआत थी—1967 आते-आते DMK ने सत्ता पर कब्जा कर लिया और तमिल राजनीति की दिशा ही बदल दी।
MGR की पार्टी: पहली बार में ही सत्ता
1972 में M. G. Ramachandran ने DMK से अलग होकर AIADMK बनाई। 1977 के चुनाव में पार्टी ने 130 सीटें जीतकर सीधा सत्ता हासिल कर ली—यह तमिलनाडु के इतिहास की सबसे प्रभावशाली चुनावी शुरुआतों में गिनी जाती है।
कुछ उम्मीदें, कुछ अधूरी कहानियां
* S. Ramadoss की Pattali Makkal Katchi (1991) — 5.89% वोट, लेकिन सिर्फ 1 सीट
* G. K. Moopanar की Tamil Maanila Congress (1996) — 40 में से 39 सीटें, जबरदस्त सफलता
* Vaiko की Marumalarchi Dravida Munnetra Kazhagam (1996) — वोट मिले, सीट शून्य
फिल्मी सितारे और राजनीति: मिश्रित नतीजे
* Vijayakanth की Desiya Murpokku Dravida Kazhagam (2006) — 8.38% वोट, 1 सीट
* Seeman की Naam Tamilar Katchi (2016) — 1.06% वोट, कोई सीट नहीं
* Kamal Haasan की Makkal Needhi Maiam (2021) — 2.62% वोट, लेकिन खाता नहीं खुला
नई पार्टियों की चुनौती: वोट से सत्ता तक का सफर
T. T. V. Dhinakaran की Amma Makkal Munnetra Kazhagam (2021) भी इसका उदाहरण है—2.35% वोट, लेकिन सत्ता से दूर।
TVK के लिए इतिहास का संदेश
Tamilaga Vettri Kazhagam की एंट्री ने यह साबित कर दिया है कि तमिलनाडु की राजनीति अब भी नए प्रयोगों के लिए खुली है। लेकिन इतिहास साफ कहता है –
* सिर्फ स्टारडम नहीं, संगठन और जमीनी पकड़ ही सत्ता तक पहुंचाती है।
* कुछ पार्टियां DMK और AIADMK की तरह इतिहास लिखती हैं, तो कुछ समय के साथ गुमनाम हो जाती हैं।
तमिलनाडु की सियासत में विजय की एंट्री एक “ब्लॉकबस्टर ओपनिंग” जरूर है, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है। क्या TVK भी DMK या AIADMK की तरह सत्ता की स्थायी ताकत बनेगी, या फिर यह भी एक राजनीतिक प्रयोग बनकर रह जाएगी – इसका फैसला आने वाले चुनावी अध्याय करेंगे।

