छत्तीसगढ़

बलौदाबाजार-भाटापारा में 326 साल पुराने हस्तलिखित ग्रंथों की खोज, ‘ज्ञान भारतम’ सर्वे में बड़ी उपलब्धि

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिला के सिमगा ब्लॉक स्थित सद्गुरु कबीर आश्रम, दमाखेड़ा में 326 वर्ष पुराने हस्तलिखित पांडुलिपियों की खोज और डिजिटाइजेशन किया गया है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि ‘ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वे’ के तहत सामने आई है, जिसका उद्देश्य देशभर में प्राचीन ग्रंथों का संरक्षण, शोध और डिजिटाइजेशन करना है।

जिला कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में किए गए इस सर्वे में वर्ष 1700 ईस्वी के आसपास की चार प्राचीन पांडुलिपियाँ चिन्हित की गईं। इनमें अनुराग सागर, अंबु सागर, दीपक सागर और ज्ञान प्रकाश शामिल हैं। ये सभी ग्रंथ देवनागरी लिपि में लिखे गए हैं और नौवें आचार्य प्रगट नाम साहेब से संबंधित माने जाते हैं। ये पांडुलिपियाँ क्षेत्र की समृद्ध साहित्यिक और ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।

इन दस्तावेजों को “ज्ञान भारतम” मोबाइल एप के माध्यम से ग्राम सरपंच की उपस्थिति में डिजिटाइज किया गया, जिससे इन्हें सुरक्षित रूप से संरक्षित किया जा सके।

इसी सर्वे के दौरान एक और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज सामने आया। सोनाखान संग्रहालय में 10 दिसंबर 1857 का एक अभिलेख मिला, जिसमें ब्रिटिश शासन द्वारा छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी वीर नारायण सिंह को फांसी देने का आदेश दर्ज है। यह दस्तावेज उनके बलिदान का प्रत्यक्ष प्रमाण माना जा रहा है।

कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास कोई पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियाँ, ताम्रपत्र या ताड़पत्र हैं, तो वे इस अभियान में सहयोग करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि मूल दस्तावेजों का स्वामित्व संबंधित व्यक्तियों या संस्थानों के पास ही रहेगा और केवल डिजिटल कॉपी तैयार की जाएगी।

‘ज्ञान भारतम’ पहल का उद्देश्य भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इसका लाभ उठा सकें।

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