विधानसभा में बदली तस्वीर: 120 पूर्व नक्सलियों ने दर्शक दीर्घा से देखी सदन की कार्यवाही, पुनर्वास नीति पर विस्तृत चर्चा

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में नक्सलियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास को लेकर एक ओर जहां सदन में विस्तृत चर्चा हुई, वहीं दूसरी ओर एक ऐतिहासिक दृश्य भी देखने को मिला। लगभग 120 पूर्व नक्सलियों को गृह विभाग के पुनर्वास कार्यक्रम के तहत दर्शक दीर्घा में बैठाकर विधानसभा की कार्यवाही दिखाई गई।
यह पहल केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि नक्सलवाद से मुख्यधारा में लौटे लोगों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के करीब लाने का प्रतीकात्मक कदम भी थी। सदन की कार्यवाही को प्रत्यक्ष देखने के दौरान पूर्व नक्सलियों ने लोकतांत्रिक संवाद, प्रश्नकाल और विधायी प्रक्रिया को समझा।

सदन में रखे गए आंकड़े
प्रश्नकाल के दौरान सरकार ने जानकारी दी कि 9 फरवरी 2026 तक कुल 2937 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें 1496 इनामी नक्सली शामिल हैं। सरकार के अनुसार आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत अब तक करोड़ों रुपए की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है, जबकि इनामी नक्सलियों की शेष राशि नियमानुसार उनके खातों में जमा की जा रही है।
आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास सुविधा और आजीविका के साधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे स्थायी रूप से सामान्य जीवन जी सकें।
लोकतंत्र से जुड़ाव का प्रतीक
विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा की कार्यवाही दिखाना एक मजबूत संदेश है—हिंसा छोड़कर लोकतंत्र की राह पर लौटने वालों का स्वागत है। यह कदम उन युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक माना जा रहा है, जो अब भी भटकाव की स्थिति में हैं।

सदन में इस विषय पर पक्ष-विपक्ष के बीच सवाल-जवाब भी हुए, लेकिन इस पहल को राज्य में शांति और विश्वास बहाली की दिशा में अहम माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की बदलती तस्वीर के बीच यह घटनाक्रम सरकार की पुनर्वास नीति और मुख्यधारा में समावेशन की रणनीति को रेखांकित करता है।
