सीएम साय के राज में ‘बस्तर बना राष्ट्रीय नीति संवाद का केंद्र’, जहां कभी गोलियां गूंजती थीं, वहां अब राष्ट्रीय नीति पर हो रहा मंथन
जगदलपुर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक ने दिया सुरक्षा, विकास और सहकारी संघवाद का बड़ा संदेश

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक केवल एक सरकारी आयोजन नहीं रही, बल्कि यह देश की आंतरिक सुरक्षा, विकास और सहकारी संघवाद की दिशा में बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश बनकर उभरी। लंबे समय तक नक्सल हिंसा की पहचान रहे बस्तर में पहली बार इतनी उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अब यह क्षेत्र संघर्ष नहीं, बल्कि संवाद और विकास की नई पहचान गढ़ रहा है।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की। इसमें योगी आदित्य नाथ, विष्णु देव साय, मोहन यादव, पुष्कर सिंह धामी सहित कई राज्यों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

क्या है मध्य क्षेत्रीय परिषद?
मध्य क्षेत्रीय परिषद दरअसल “ज़ोनल काउंसिल” प्रणाली का हिस्सा है। भारत सरकार ने राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और साझा समस्याओं के समाधान के लिए देश को पांच क्षेत्रीय परिषदों में बांटा है —
* उत्तरी क्षेत्रीय परिषद
* मध्य क्षेत्रीय परिषद
* पूर्वी क्षेत्रीय परिषद
* पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद
* दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद
मध्य क्षेत्रीय परिषद में मुख्य रूप से छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड शामिल होते हैं। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री करते हैं।

1956 से शुरू हुई थी परिषदों की व्यवस्था
इन परिषदों का गठन राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के तहत किया गया था। भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बाद यह आशंका थी कि राज्यों के बीच विवाद और तनाव बढ़ सकते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने संवाद और समन्वय के लिए एक स्थायी मंच तैयार किया।
इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य था —
“सहकारी संघवाद” यानी केंद्र और राज्य मिलकर काम करें।
बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
जगदलपुर में हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इनमें प्रमुख रूप से —
* नक्सल उन्मूलन और संयुक्त सुरक्षा अभियान
* अंतरराज्यीय सीमा विवाद
* सड़क और परिवहन नेटवर्क
* साइबर अपराध नियंत्रण
* महिला एवं बाल सुरक्षा
* वन अधिकार और पर्यावरण
* जल प्रबंधन
* पुलिस समन्वय और इंटेलिजेंस शेयरिंग
* डिजिटल कनेक्टिविटी और प्रशासनिक सुधार
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में केवल सुरक्षा कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, इंटरनेट और रोजगार जैसे विकास कार्यों को भी समान गति से आगे बढ़ाया जाए।

नक्सलवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति पर जोर
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष राज्यों के बीच सुरक्षा समन्वय को मजबूत करना रहा। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संयुक्त ऑपरेशन, सीमा क्षेत्रों में बेहतर तालमेल और खुफिया जानकारी साझा करने पर सहमति बनी।
केंद्र सरकार लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि नक्सलवाद के खिलाफ अब राज्यों और केंद्र की रणनीति पहले से अधिक संगठित और समन्वित है।
क्यों खास है बस्तर में यह आयोजन?
जगदलपुर में इस बैठक का आयोजन केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक संदेश भी माना जा रहा है।
यह आयोजन तीन बड़े संकेत देता है —
1. बस्तर अब केवल संघर्ष का क्षेत्र नहीं रहा।
2. केंद्र सरकार नक्सल नियंत्रण की अपनी रणनीति को राष्ट्रीय स्तर पर दिखाना चाहती है।
3. विकास और निवेश के नए दौर के लिए माहौल तैयार किया जा रहा है।
लंबे समय तक “रेड कॉरिडोर” के रूप में चर्चित बस्तर को अब लोकतांत्रिक संवाद और विकास के मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है।

पहले भी इन परिषदों से निकले हैं बड़े फैसले
क्षेत्रीय परिषदों की बैठकों में पहले भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा चुके हैं। इनमें —
1. संयुक्त नक्सल विरोधी अभियान
राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाकर कई नक्सल प्रभावित इलाकों में संयुक्त कार्रवाई की रणनीति बनी।
2. परिवहन समझौते
बस परमिट और माल परिवहन को आसान बनाने के लिए राज्यों के बीच समझौते हुए।
3. साइबर और संगठित अपराध नियंत्रण
साझा डेटाबेस और पुलिस समन्वय तंत्र विकसित करने पर सहमति बनी।
4. जल विवादों पर संवाद
नदी जल बंटवारे और सिंचाई परियोजनाओं पर प्रारंभिक सहमति के प्रयास हुए।

राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से भी अहम बैठक
विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक केवल सुरक्षा और प्रशासनिक मुद्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका राजनीतिक संदेश भी काफी बड़ा है। केंद्र सरकार ने एक ओर नक्सलवाद के खिलाफ सख्त रुख दिखाया, वहीं दूसरी ओर विकास और समावेशी शासन की तस्वीर भी सामने रखी।
बस्तर में लगातार बढ़ती सड़क, रेल, मोबाइल नेटवर्क और औद्योगिक परियोजनाओं के बीच यह बैठक भविष्य में बड़े निवेश और प्रशासनिक विस्तार का संकेत भी मानी जा रही है।
बदलते बस्तर की नई तस्वीर
मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि अब बस्तर की पहचान केवल हिंसा और संघर्ष से नहीं जुड़ी रहेगी। जगदलपुर में राष्ट्रीय स्तर की इस बैठक ने यह संदेश दिया कि यह क्षेत्र अब विकास, संवाद, नीति निर्माण और राष्ट्रीय मुख्यधारा में मजबूत भागीदारी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की प्रमुख योजनाएं
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ विकास आधारित मॉडल पर तेजी से काम किया जा रहा है। सरकार की कई योजनाएं सीधे तौर पर आदिवासी इलाकों, युवाओं, शिक्षा, सड़क और रोजगार से जुड़ी हैं।
प्रमुख योजनाएं
- नियद नेल्लानार योजना
नक्सल प्रभावित गांवों तक सड़क, बिजली, पानी, राशन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने की योजना। - नियद नेल्लानार क्लीनिक एवं कैंप
दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की पहल। - बस्तर ओलंपिक
युवाओं को खेलों से जोड़कर मुख्यधारा में लाने और नक्सल प्रभाव से दूर रखने का अभियान। - हाट-बाजार क्लीनिक योजना
ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में साप्ताहिक बाजारों के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना। - पीएम जनमन योजना का राज्य स्तर पर विस्तार
विशेष पिछड़ी जनजातियों तक सड़क, आवास, मोबाइल नेटवर्क और बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना। - सड़क एवं मोबाइल कनेक्टिविटी विस्तार अभियान
अबूझमाड़ और अंदरूनी इलाकों तक सड़क और 4G नेटवर्क पहुंचाने पर विशेष जोर। - आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास कार्यक्रम
मुख्यधारा में लौटे युवाओं को रोजगार, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता।

