जगदलपुर में अमित शाह का बड़ा दावा: “भारत अब नक्सल-मुक्त”, बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनाने का संकल्प

अमित शाह ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में शहीदों के परिजनों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs) के जवानों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर कहा कि “भारत अब नक्सल-मुक्त हो चुका है।” उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने वह लक्ष्य हासिल कर लिया है, जिसे पूरा करना कभी असंभव माना जाता था।
अमित शाह ने कहा कि 24 अगस्त 2024 को देश को नक्सलमुक्त बनाने का संकल्प लिया गया था और 31 मार्च 2026 से पहले ही यह लक्ष्य हासिल कर लिया गया। उन्होंने कहा कि कश्मीर, नॉर्थईस्ट और नक्सलवाद जैसी देश की तीन बड़ी आंतरिक चुनौतियों पर मोदी सरकार ने निर्णायक जीत हासिल की है।
कार्यक्रम में सीएम विष्णु देव साय, गृहमंत्री विजय शर्मा, गृह सचिव गोविंद मोहन, आईबी निदेशक तपन डेका सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद ने बस्तर की कला, संस्कृति, संगीत और परंपराओं को लंबे समय तक दबाकर रखा, लेकिन अब क्षेत्र में “नया सवेरा” लौट रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले पांच वर्षों में बस्तर देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनकर उभरेगा।
अमित शाह ने कहा कि नक्सलमुक्त भारत बनाने में डीआरजी, कोबरा जवानों, सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, छत्तीसगढ़ पुलिस, एसटीएफ और बस्तर फाइटर्स की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट, प्रहार, ऑक्टोपस और डबल बुल जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि जवानों ने 45 डिग्री तापमान, माइंस और कठिन परिस्थितियों के बीच अभियान चलाकर नक्सल नेटवर्क को खत्म किया।
उन्होंने कहा कि “माओवाद इसलिए नहीं फैला था कि विकास नहीं था, बल्कि हथियारबंद नक्सल अभियान ने ही विकास को रोका।” अब जब नक्सलवाद समाप्त हो चुका है, तो सरकार तेजी से विकास कार्यों को जमीन पर उतारेगी।
इस दौरान अमित शाह ने “शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा” परियोजना की शुरुआत की जानकारी देते हुए कहा कि CAPF के 70 कैंप अब विकास केंद्र के रूप में भी काम करेंगे। यहां जनसेवा केंद्र, बैंकिंग सुविधा, स्वास्थ्य सेवाएं, डेयरी कलेक्शन सेंटर, कौशल विकास और कृषि मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

गृह मंत्री ने कहा कि लगभग 3000 आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों के पुनर्वास, स्किल डेवलपमेंट और शिक्षा के लिए केंद्र सरकार ने शुरुआती तौर पर 20 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि समाज इन्हें मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक स्वीकार करेगा।
उन्होंने कहा कि “विकसित बस्तर के बिना विकसित भारत 2047 का सपना अधूरा है।” केंद्र और राज्य सरकार अगले पांच वर्षों में बस्तर को देश के अन्य विकसित क्षेत्रों के बराबर लाने के लिए सड़क, बैंक, डाकघर, जल, बिजली, शिक्षा और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करेगी।
