बस्तर के डॉ. रामचंद्र गोडबोले को पद्मश्री अवार्ड, चार दशक से आदिवासी अंचलों में दे रहे स्वास्थ्य सेवा
चार दशक से अधिक समय से आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सेवा और कुपोषण उन्मूलन के लिए कर रहे हैं कार्य

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में आदिवासी समुदायों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार के लिए चार दशक से अधिक समय तक समर्पित सेवा देने वाले समाजसेवी एवं चिकित्सक Dr. Ramchandra Godbole को पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किए जाने पर प्रदेश में हर्ष का वातावरण है। चिकित्सा और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान ने बस्तर जैसे सुदूर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हजारों आदिवासी परिवारों के जीवन को नई दिशा दी है।

मूलतः महाराष्ट्र के सतारा जिले में 18 जून 1960 को जन्मे डॉ. गोडबोले ने आयुर्वेदिक चिकित्सा की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपना जीवन वनवासी और आदिवासी समुदायों की सेवा को समर्पित कर दिया। वनवासी कल्याण आश्रम के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने प्रारंभिक 12 वर्षों तक महाराष्ट्र में भील समुदाय के बीच कार्य किया और बाद में वर्ष 1990 में अपनी पत्नी श्रीमती सुनीता गोडबोले के साथ बस्तर पहुंचे।
उस समय बस्तर देश के सबसे अविकसित और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में गिना जाता था। दंतेवाड़ा जिले के बारसूर क्षेत्र में अबूझमाड़ के समीप उन्होंने एक छोटे से क्लीनिक के माध्यम से सेवा कार्य प्रारंभ किया। दूरस्थ वन क्षेत्रों से आदिवासी मरीज कई किलोमीटर पैदल चलकर इलाज के लिए पहुंचते थे। अनेक रोगी गंभीर बीमारियों से महीनों तक बिना उपचार के पीड़ित रहते थे। ऐसे समय में डॉ. गोडबोले ने न केवल उपचार उपलब्ध कराया, बल्कि गंभीर रोगियों को जिला अस्पताल और आवश्यकता पड़ने पर रायपुर तक पहुंचाकर उनका इलाज सुनिश्चित किया।
लगातार चिकित्सा सेवा और मानवीय समर्पण के बल पर उन्होंने बस्तर में अपने शुरुआती 12 वर्षों के दौरान लगभग 3,000 गंभीर रूप से बीमार आदिवासी मरीजों का सफल उपचार कराया। बाद के वर्षों में उन्होंने स्थायी क्लीनिक के बजाय दूरस्थ वन क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की पहल शुरू की। पिछले 15 वर्षों में विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों के सहयोग से 114 स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए, जिनसे 9,000 से अधिक मरीजों की जांच और उपचार संभव हो सका।
वर्तमान में डॉ. गोडबोले बस्तर स्थित “बनफूल” संगठन के अध्यक्ष हैं, जो आदिवासी बच्चों में कुपोषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर कार्य कर रहा है। उनकी सेवाओं के कारण बस्तर में स्वास्थ्य जागरूकता और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
डॉ. गोडबोले और उनकी पत्नी को पूर्व में भी अनेक सामाजिक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। वर्ष 2001 में पुणे के नाटू प्रतिष्ठान द्वारा उन्हें “सेवा गौरव पुरस्कार” से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा मुंबई में स्वामी विवेकानंद पुरस्कार तथा दंतेवाड़ा जिला प्रशासन द्वारा प्रशंसा प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जा चुका है।
पद्मश्री सम्मान के लिए चयन को बस्तर और समूचे छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। डॉ. गोडबोले का जीवन समर्पण, सेवा और मानवीय संवेदनाओं का प्रेरणादायी उदाहरण बन गया है।

